कुलां। कुलां गांव की ममता आज केवल एक नाम नहीं, बल्कि सैकड़ों महिलाओं के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की पहचान बन चुकी है। एक सामान्य ग्रामीण परिवार से निकलकर ममता ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो हालात भी रास्ता दे देते हैं और अब प्रदेश सरकार भी महिला सशक्तीकरण में प्रबुद्ध नाम बन चुकी ममता को सम्मानित करेगी।
ममता ने महिलाओं को केवल सिलाई ही नहीं सिखाई, बल्कि घर पर किचन गार्डन तैयार करने, संसाधनों का सही उपयोग करने और आत्मनिर्भर बनने के तरीके भी बताए।
उन्होंने अपने गांव हैदरवाला में सिलाई सेंटर खोलकर एक स्थायी प्लेटफॉर्म दिया, जहां महिलाएं सीख भी सकें और कमाई भी। शादी के बाद भी ममता का हौसला नहीं डगमगाया। उनके पति ने उनके सपनों को समझा और आगे बढ़ने में पूरा सहयोग दिया। यही समर्थन ममता की ताकत बना। आज ममता केवल महिला सशक्तीकरण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जल संरक्षण जैसे सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।