मिड-डे मील, आशा वर्कर्स, आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स सहित तमाम परियोजना कर्मियों ने शुक्रवार को मांगों को लेकर हड़ताल की और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उपायुक्त के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने उनकी मांगों को नहीं माना तो वे आंदोलन तेज करेंगी। वहीं, उपायुक्त ने इस संबंध में तीन फरवरी को सिविल सर्जन, परियोजना अधिकारी व जिला शिक्षा अधिकारी के साथ बैठक बुलाई है।
गगनदीप कौर व सीटू जिला प्रधान जगतार सिंह ने प्रदर्शनकारियों को कहा कि भाजपा सरकार चुनावी वायदों को पूरा करने की बजाय पूंजीपतियों के हितों के लिए सरकारी विभागों का ठेकाकरण व निजीकरण कर करोड़ों परियोजना कर्मियों का रोजगार छीनने पर आमादा है। उन्होंने कहा कि देश में करोड़ों परियोजना वर्कर, कच्चे कर्मचारी व ठेका मजदूर वर्षों से काम कर रहे हैं। उनका काम तो पक्का है, लेकिन नौकरी कच्ची है। सत्ता में आने के बाद भाजपा वादों से मुकर रही है। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसे अभियान चलाकर वाहवाही लूटने की कोशिश कर रही है, लेकिन वास्तव में परियोजना कर्मी का काम कर रही बेटियों का शोषण किया जा रहा है। उनके मानदेय में कटौती कर उन्हें काम से हटाया जा रहा है। इस शोषण को किसी भी सूरत में सहन नहीं किया जा सकता।
प्रधानमंत्री को भेजे ज्ञापन में उन्होंने परियोजनाओं में निजीकरण व ठेका प्रथा को बंद करने, सभी परियोजना वर्करों को पक्का करने व तब तक न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये लागू करने, परियोजनाओं के बजट में बढ़ोतरी करने, श्रम कानून सख्ती से लागू करने, सामाजिक सुरक्षा लाभ देने, समय पर वेतन देने सहित अनेक समस्याओं को उठाया है।
प्रदर्शन में सीटू के जिला उपप्रधान रमेश जांडली, कैशियर राजकुमार निराणियां, सहसचिव बेगराज, जंगीर सिंह, गुरप्रीत सिंह, ब्रह्मी देवी, पिंकी भिरड़ाना, दमयंती धारनियां, सुनीता ढाणी सांचला, मलकीत कौर रतिया, गीता ढिंगसरा, सुदेश ढाबी, माया पूनियां, अनिता इंदाछुई, सरीना, सलोचना अकांवाली सहित सैंकड़ों परियोजना वर्कर मौजूद रहीं। प्रदर्शन की अध्यक्षता मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन की जिला प्रधान गगनदीप कौर ने की।