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स्कूल का भट्ठा बैठा है, इसका ऑडिट कराओ

Fri, 20 Jan 2017 11:24 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहाबाद
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धांगड़ स्कूल में हाथ धोने की जगह कच्ची और साबुन ना होने पर संबंधित इंचार्ज को हड़काते निदेशक एमएल कौशिक । - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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धांगड़ गर्ल्स हाई स्कूल में शिक्षा विभाग के निदेशक को निरीक्षण के दौरान कई खामियां मिलीं। स्कूल में मिड-डे मील गैस-चूल्हे की बजाय अंगीठी पर पकाया जा रहा था। वहीं, हाथ धोने के लिए साबुन तक की व्यवस्था नहीं थी। इन खामियों से भड़के निदेशक एमएल कौशिक ने तुरंत पंचकूला स्थित अपने कार्यालय के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में स्कूल का तुरंत ऑडिट कराया जाए और तीन दिन में इसकी रिपोर्ट उन्हें भेजी जाए। ऑडिट टीम में डिप्टी डायरेक्टर, अकाउंट विभाग सहित अन्य अधिकारी शामिल होंगे।

धांगड़ स्कूल में निरीक्षण के दौरान निदेशक एमएल कौशिक का पारा तो उसी समय चढ़ गया था जब उन्होंने गैस चूल्हे की बजाय अंगीठी पर मिड-डे मील पकता देखा। वे इस बारे में स्कूल के प्राचार्य से बात कर ही रहे थे कि अंगीठी का धुआं पूरे स्कूल में फैलने लगा। इस पर निदेशक का गुस्सा और बढ़ गया। उन्होंने मिड-डे मील इंचार्ज को चेतावनी दी कि इस लापरवाही के लिए उसे निलंबित भी किया जा सकता है। धुएं का बच्चों की आंखों और उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि हम स्कूलों को धुआं और प्रदूषण रहित बनाना चाहते हैं और आप लोग वापस उसी ढर्रे पर लौटना चाहते हो।
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मिड-डे मील की समस्या से दो-चार होने के बाद निदेशक ने पास खड़े चपरासी और अन्य स्टाफ को बच्चों के हैंडवाश की जगह दिखाने को कहा। इस पर स्टाफ सदस्य उन्हें पास में स्थित एक पानी की टंकी के पास लेकर गए। जगह कच्ची थी और हाथ धोने के लिए साबुन तक की व्यवस्था नहीं थी। यह देखते ही निदेशक एमएल कौशिक फिर भड़क गए। उन्होंने कहा कि स्कूलों में बाकायदा हैंडवाश डे मनाया जाता है और यहां पर साबुन की ही व्यवस्था नहीं। इस पर इंचार्ज ने चपरासी को कहा कि सुबह मंगवाए गए सामान में साबुन भी था, लेकिन चपरासी ने इससे इंकार किया। इसके बाद निदेशक कौशिक ने पंचकूला में अपने कार्यालय में फोन लगाया और कहा कि धांगड़ स्कूल का भट्ठा बैठा हुआ है, इनका ऑडिट कराया जाए।

बच्चों से कहा, चंडीगढ़ से मैं ही आया हूं, दोबारा भी आऊंगा
अध्यापकों को झाड़ पिलाने के बाद शिक्षा विभाग के निदेशक कक्षाओं में गए और विद्यार्थियों से रूबरू हुए। हालांकि, उनके कक्षाओं में आने से पहले उनकी टीम विद्यार्थियों का एग्जाम ले रही थी। कौशिक ने टीम से नकल के बारे में पूछा, जिस पर उन्हें ना में जवाब मिला। इसके बाद उन्होंने बच्चों से बातचीत की। पूछा कि क्या आज से पहले कोई चंडीगढ़ से अफसर उनकी कक्षा में आया। इस पर बच्चों ने भी ना में जवाब दिया। इस पर वे फिर बोले, अब मैं आया हूं, दोबारा भी आऊंगा।
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अगले साल जनवरी से हो सकते हैं शीतकालीन अवकाश
निरीक्षण के बाद पत्रकारों से बातचीत में शिक्षा विभाग के निदेशक एमएल कौशिक से जब सर्दियों में अधिक अवकाश के बारे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अभी तक उनके पास प्राइवेट स्कूलों की एसोसिएशन की ओर से इस बारे में कोई ऐतराज नहीं आया है। फिर भी अगले साल से ऐसा किया जा सकता है कि शीतकालीन अवकाश को दिसंबर की बजाय जनवरी में कर दिया जाए। जिलावार शीतकालीन अवकाश के विकल्प पर उन्होंने कहा कि इससे विभाग का सिस्टम बिगड़ेगा। कंप्यूटर शिक्षकों की लंबित नियुक्ति के बारे में कौशिक ने बताया कि यह मामला कोर्ट में है। हमारी तैयारी पूरी है। कोर्ट का मामला निपटते ही इस दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे।
 
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