फतेहाबाद। शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों में बेहतर पढ़ाई को लेकर रोजाना नई योजनाएं लेकर आ रहा है और निजी स्कूलों को टक्कर देने का दावा कर रहा है, लेकिन धरातल पर हकीकत ये है कि स्कूलों में शिक्षकों के करीब 22 फीसदी पद ही खाली पड़े हैं। यहां तक कि 33 फीसदी पद तक प्राध्यापकों के खाली हैं और 74 स्कूलों में प्रिंसिपल ही नहीं हैं। हालात ये हैं कि गुरुजी बिना विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
आपको जानकर हैरानी होगी कि जिले के एक भी खंड में स्थायी खंड शिक्षा अधिकारी नहीं है। शिक्षा विभाग ने स्कूलों से प्रिंसिपल उधार लेकर बीईओ का अतिरिक्त कार्यभार दे रखा है और ये स्कूल छोड़ दफ्तर संभाल रहे हैं। शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में शिक्षकों के 5802 पद स्वीकृत हैं लेकिन जिले में 3724 स्थायी शिक्षक हैं। इसके अलावा 746 अतिथि अध्यापक हैं। हालात ये हैं कि 74 स्कूलों में प्रिंसिपल नहीं है। मुख्य अध्यापक के 31 पद खाली है ये ही नहीं मिडिल स्कूल मुखियाओं के भी 79 पद जिले में खाली हैं। बता दें कि खंड स्तर पर स्कूलों को संभालने के लिए खंड शिक्षा अधिकारियों की अहम भूमिका होती है। लेकिन जिले में एक भी खंड शिक्षा अधिकारी नहीं है। फतेहाबाद में राजकीय कन्या स्कूल के प्रिंसिपल सुरेश शर्मा बीईओ फतेहाबाद, रतिया में गांव हड़ोली स्कूल के प्रिंसिपल रामसिंह को रतिया बीईओ, खंड भूना में जगदीश कुमार, खंड जाखल में विजय प्रतीक, भट्टू में प्रवीन कुमार को व खंड टोहाना में रघुबीर सिंह को स्कूल के अलावा बीईओ का अतिरिक्त कार्यभार दे रखा है। संवाद
जिले में सरकारी स्कूलों की स्थिति
स्कूल संख्या
सीनियर सेकेंडरी 92
संस्कृति स्कूल 6
हाई स्कूल 48
मिडल स्कूल 86
प्राइमरी स्कूल 384
कस्तूरबा स्कूल 5
आरोही स्कूल 5
जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की स्थिति
पद स्वीकृत स्थायी गेस्ट टीचर खाली पद
जेबीटी 1985 1521 367 97
मुख्य शिक्षक 133 98 0 35
टीजीटी 1566 819 311 436
ईएसएचएम 232 153 0 79
लेक्चरर 1732 1084 68 580
हेड मास्टर 49 18 0 31
प्रिंसिपल 105 31 0 74
गणित, हिंदी, अंग्रेजी पढ़ाने वाले शिक्षकों की कमी
शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में टीजीटी अंग्रेजी के 36 पद हैं और इसमें 6 खाली हैं। हिंदी के 46 पद खाली पड़े हैं। गणित के 12 शिक्षकों की कमी है। संस्कृत के 34 और विज्ञान के 48 टीजीटी पद खाली है।
शिक्षकों की पहले कमी, फिर भी करवाए जा रहे क्लर्कियल काम
स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, सरकार इस तरफ ध्यान नहीं दे रही है। यहां तक कि जो शिक्षक स्कूल में मौजूद हैं उन्हें भी काम नहीं करने दे रही है। शिक्षकों से क्लर्कियल काम करवाए जा रहे हैं। शिक्षक पढ़ाना छोड़ अन्य कामों में उलझे रहते हैं। शिक्षा विभाग को चाहिए कि शिक्षकों को सिर्फ पढ़ाने का काम ही सौंपा जाना चाहिए और जो पद खाली पड़े है उन्हें भरा जाएं।
-देवेंद्र सिंह दहिया, राज्य चेयरमैन, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ
ट्रांसफर ड्राइव खुलने के बाद स्थिति होगी साफ :
शिक्षा विभाग ने एमआईएस पोर्टल पर 20 मई तक डाटा मांगा है। पोर्टल पर डाटा अपडेट होने के बाद जिले के स्कूलों में शिक्षकों के पद और जरूरत का पता चल पाएगा। उम्मीद है ट्रांसफर ड्राइव खुलने के बाद स्थिति साफ हो जाएगी।
- दयानंद सिहाग, जिला शिक्षा अधिकारी