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सरकार एवं पुरातत्व विभाग ने म्यूजियम संग्रहालय बनाने में कई वर्ष गंवाए, अब जगी उम्मीद

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गांव कुनाल में हड़प्पा कालीन टीला। - फोटो : Fatehabad
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भूना। गांव कुनाल में एक प्राचीन टीले पर वर्ष 1985 से लेकर 1994 तक पुरातत्व विभाग ने करीब नौ एकड़ में खुदाई की थी। खुदाई के दौरान आरंभिक हड़प्पा सभ्यता की तरफ इशारा करती हुई छह हजार वर्ष पुरानी चीजें मिलीं थी। कुनाल के इस टीले पर आभूषणों का एक बड़ा समूह पाया गया था। लोहा, तांबा के उपकरण, कीमती पत्थरों के मोती, चांदी के कंगन आदि पाए गए थे। मगर सरकार एवं पुरातत्व विभाग ने म्यूजियम संग्रहालय बनाने में कई वर्ष गवां दिए। अब म्यूजियम संग्रहालय बनाने को लेकर लगाया गया सवा करोड़ रुपये का टेंडर खुल चुका है।
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बता दें कि गांव कुनाल में म्यूजियम संग्रहालय बनाने का टेंडर खुल चुका है, जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है। रतिया-भूना मार्ग से म्यूजियम संग्रहालय तक 14 फुट चौड़ी और 500 फुट लंबी सड़क भी और किले के चारों ओर चारदीवारी का निर्माण तथा म्यूजियम संग्रहालय के लिए बिल्डिंग बनाने का प्रस्ताव है। वहीं टीले की खुदाई का कार्य भी काफी धीमी गति से चल रहा है। कुनाल टीले पर भारतीय उपमहाद्वीप में आरंभिक हड़प्पा सभ्यता के अध्ययन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और यहां खुदाई किए जाने से उत्कृष्ट हड़प्पा संस्कृति के उदय और इसके प्राचीन चरणों पर भविष्य में अनुसंधान के नए द्वार खुलेंगे। सरकार एवं पुरातत्व विभाग पिछले कई वर्षों से घोषणा कर चुके हैं कि गांव कुनाल हड़प्पा कालीन जगह में भव्य म्यूजियम संग्रहालय बनेगा जिसमें देशभर से विद्यार्थी पुरातत्व की पढ़ाई कर सकेंगे। संवाद
चार एकड़ में बनेगा संग्रहालय
संग्रहालय के लिए अधिकृत की गई 4 एकड़ जगह में बनेगा। कुनाल एक हड़प्पा कालीन स्थल है इसलिए अब पूर्व हड़प्पा कालीन ऐतिहासिक चीजों की तलाश रहेगी, जिससे उस काल के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटाकर प्राचीन संस्कृति से संबंधित विद्यार्थियों को पढ़ाया जाए। इस खुदाई में मिलने वाली पुरातत्व अवशेष को राष्ट्रीय संग्रहालय में रखा जाएगा। फिलहाल 22 वर्ष बीत जाने के बावजूद गांव कुनाल का प्राचीन किला मात्र तारबंदी की सुरक्षा के बीच में है। हड़प्पा काल सांस्कृतिक सामग्री को बचाने के लिए किले के चारों और चहारदीवारी बनाने के साथ साथ म्यूजियम संग्रहालय का निर्माण जल्द किए जाने की आवश्यकता है।
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खुदाई में मिला था 24 कैरेट सोने का हार और चांदी का मुकुट
गांव कुनाल के टीले पर साल 1985 में खुदाई का काम शुरू किया गया था और काम साल 1994 तक चला। शुरुआती खुदाई में यहां पर 24 कैरेट सोने का हार व चांदी का मुकुट मिला था। ऐसे आभूषण हरियाणा में पहले नहीं मिले हैं, जिससे साफ जाहिर हो रहा है कि यह सभ्यता हड़प्पा कालीन से पहले प्री हड़प्पा कालीन के समय की है जो कि 5500 से 6 हजार साल पुरानी है जबकि हड़प्पा कालीन सभ्यता करीब 3500 साल पुरानी है। कुल साढ़े पांच एकड़ जमीन को कवर किया गया है। यहां पर पहले एक आभूषण पिघलाने की भट्ठी भी मिली थी, जिससे जाहिर है कि यहां लोग आभूषण ढालने का काम करते थे। उधर दूसरी ओर गांव भट्टू में कर्ण कोट टीले में पिछले चार वर्षों से प्राचीन काल की कई सामग्री पुरातत्व विभाग को मिल चुकी है। जिसमें आटा चक्की, चांदी के सिक्के, तलवार के टुकड़े, मंदिर होने के निशान, काले रंग की मूर्ति, घर की चारदीवारी, कसाण व गुप्तवंश की तीन वर्ष पुरानी कई चीजें मिल चुकी हैं। टीले का क्षेत्रफल लगभग 9 एकड़ में हड़प्पा कालीन स्थल है, लेकिन उसकी देखरेख से संबंधित कोई पुख्ता प्रबंध नहीं है। प्राचीन विरासत को बचाने के लिए कर्ण कोट टीले के चारों ओर तारबंदी तक नहीं की हुई है।
कोट
गांव कुनाल में म्यूजियम संग्रहालय बनाने के लिए सरकार से बजट जारी हो चुका है इसलिए जल्द ही वहां पर म्यूजियम संग्रहालय बनकर तैयार हो जाएगा। टीले के चारों ओर चहारदीवारी बनाई जाएगी। वहीं कर्ण कोट टीले को लेकर जमीन का अधिग्रहण प्रक्रिया चल रही है।
-डॉ. बुनानी भट्टाचार्य, डिप्टी डायरेक्टर पुरातत्व विभाग
गांव कुनाल में म्यूजियम संग्रहालय बनाने को लेकर लगाया गया सवा करोड़ रुपए का टेंडर ओपन हो चुका है। एक सप्ताह के बाद निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। रतिया-भूना मार्ग से म्यूजियम संग्रहालय तक 14 फुट चौड़ी और 500 फुट लंबी सड़क भी बनाई जाएगी। किले के चारों ओर चारदीवारी का निर्माण होगा तथा म्यूजियम संग्रहालय के लिए बिल्डिंग बनेगी।
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-विजय कुमार शर्मा एसडीओ लोक निर्माण विभाग
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