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पिता की कुर्बानी व्यर्थ नहीं गई, सरकार को घुटने टेकने पर बेबस होना पड़ा

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टोहाना। मृतक किसान की फोटो के साथ परिजन। - फोटो : Fatehabad
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भूना। किसान आंदोलन के दौरान अग्रोहा-हिसार के बीच चिकनवास टोल प्लाजा पर लगातार पांच महीनों तक विरोध प्रदर्शन स्थल पर किसान साधु राम शर्मा बढ़ चढ़कर भाग लेते थे। गांव गोरखपुर के 67 वर्षीय किसान साधु राम शर्मा को 8 मार्च 2021 को सीने में दर्द होने के कारण टोल प्लाजा से अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया गया था। जहां उन्होंने कुछ ही मिनट के बाद दम तोड़ दिया था। किसान का गांव गोरखपुर में विभिन्न किसान संगठनों ने गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया था।
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मगर शुक्रवार की सुबह प्रधानमंत्री के भाषण के बाद मृतक किसान साधु राम के बेटे बलजीत शर्मा की आंखें नम हो गईं। बलजीत शर्मा ने कहा कि उनके पिता और अन्य किसानों की कुर्बानी व्यर्थ नहीं गई। आखिरकार सरकार को किसानों के आगे घुटने टेकने पर विवश होना पड़ा। किसान मजदूरों के हितों की रक्षा को लेकर उनके पिता ने लंबा संघर्ष किसानों के बीच रहकर किया और अपने प्राण कृषि कानून के खिलाफ समर्पित कर दिए। बलजीत शर्मा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार ने जो तीनों कृषि कानून वापस लिए हैं उसके लिए हम सरकार का अति धन्यवाद करते हैं। क्योंकि सरकार को भी कहीं न कहीं इस बात का एहसास था कि इन बिलों में आम किसान और छोटे जमींदारों के हित प्रभावित हो रहे हैं। जिन किसान बुजुर्गों ने इस किसान आंदोलन में अपनी अपने प्राणों की शहादत दी है, उनका बलिदान बेकार नहीं गया। वहीं आने वाली पीढ़ियां उन शहादत देने वाले किसानों का ऋण कभी भी अदा नहीं कर पाएंगी।
निर्णय का स्वागत, शहादत देने वाले किसानों के परिवार के सदस्य को नौकरी दे सरकार
टोहाना। टोहाना खंड के गांव समैन निवासी 44 वर्षीय किसान शमशेर सिंह गिल पुत्र सरूपा राम की गत 27 जनवरी 2021 को टिकरी बॉर्डर पर निमोनिया होने के कारण मौत हो गई थी। किसान शमशेर अपने ट्रैक्टर के साथ टिकरी बॉर्डर पर आंदोलन में शामिल होने के लिए गए थे। 26 जनवरी को किसानों के ट्रैक्टर मार्च में भी शामिल होने के बाद ठंड लगने से उन्हें निमोनिया हो गया। मृतक किसान शमशेर के बड़े भाई दर्शन सिंह ने प्रधानमंत्री द्वारा 3 कृषि कानूनों को वापस लेने की गई घोषणा पर कहा कि हम प्रधानमंत्री के इस फैसले का स्वागत करते हैं। प्रधानमंत्री ने इन कानूनों को बहुत पहले वापिस ले लेना चाहिए था, लेकिन फिर भी उनका स्वागत है। दर्शन सिंह ने आगे कहा कि जब तक इन कानूनों को संसद रद्द नहीं करती तब तक वह किसानों आंदोलन का समर्थन करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि आंदोलन में शहादत देने वाले किसानों को सरकार शहीद का दर्जा दे व उनकी आर्थिक मदद करे। शमशेर के साले रमेश झांडली ने कहा कि सरकार किसान आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दे व उनकी आर्थिक मदद करे। उन्होंने सरकार के निर्णय को किसानों की बड़ी जीत बताया और एमएसपी पर कानून बनाने की मांग की।

गांव गोरखपुर के बलजीत शर्मा की अपने पिता साधु राम शर्मा के साथ किसान आंदोलन से पहले की सेल्फी फोट?- फोटो : Fatehabad

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