पराली प्रबंधन को लेकर हरियाणा के फतेहाबाद जिले के गांव हसंगा के किसान सूरजभान रोल मॉडल बनकर सामने आए हैं। सूरजभान अपने ही खेत में नहीं बल्कि हसंगा से करीब 150 किलोमीटर दूर जाकर पेहवा व कुरुक्षेत्र में भी किसानों को पराली प्रबंधन करवा रहे हैं। सूरजभान पिछले छह सालों से पराली प्रबंधन में जुटे हैं और उन पर कई डॉक्यूमेंट्री भी बन चुकी हैं। उनको 2018 में प्रदेश के राज्यपाल भी सम्मानित कर चुके हैं।
पराली जलाने से उठने वाला धुआं पर्यावरण का दुश्मन बनता जा रहा है। कृषि विभाग किसानों को पराली जलाने के बजाए इसे खाद या फिर गांठें बनाने के लिए प्रेरित कर रहा है। जिले में अधिकांश किसान पराली को पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल करते हैं, लेकिन कई जगह पर पराली जला भी दी जाती है।
किसान कहते हैं कि पराली को आसानी से खेत में जोता नहीं जा सकता है। लेकिन गांव हसंगा के किसान सूरजभान पराली को जलाने के बजाए समय-समय पर सरकार से मिलने वाली सुविधाओं के अनुसार, पराली का प्रबंधन कर रहे हैं।
2018 में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने किया था सम्मानित
किसान सूरजभान ने 2016 में पराली प्रबंधन का काम आरंभ किया था। उस समय सूरजभान ने 20 एकड़ जमीन पर पराली प्रबंधन किया। बाद में अन्य किसानों को समझाते हुए उन्होंने पराली प्रबंधन का दायरा बढ़ाया और अन्य किसानों को भी जागरूक किया।
अब सूरजभान गांव हसंगा से 150 से 200 किलोमीटर दूर जाकर पेहवा व कुरुक्षेत्र में भी किसानों को पराली प्रबंधन करवा रहे हैं। पराली प्रबंधन को लेकर किसान सूरजभान को 2018 में हिसार के चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय में हिमाचल प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने सम्मानित भी किया था।
20 दिनों से बैठे हैं कुरुक्षेत्र में
सूरजभान ने बेलर मशीन से 2021 में पहले 400 एकड़ में पराली प्रबंधन किया और इस साल पिछले 20 दिनों से कुरुक्षेत्र के किसानों के खेतों में पराली प्रबंधन किया है। यहां पर अब तक वह 500 एकड़ में बेलर मशीन से गांठें बना चुके हैं। अब वह अपने गांव में किसानों के खेतों में करीब एक हजार एकड़ जमीन पर पराली प्रबंधन करेंगे।
मैंने 2016 में पराली प्रबंधन करना शुरू किया था। सबसे पहले मैंने अपने खेत में पराली प्रबंधन किया, उस समय मेरे पास 20 एकड़ में धान की फसल थी। 2016 में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार में आयोजित किसान सम्मेलन में भाग लेने का मौका मिला। सम्मेलन पराली प्रबंधन के काफी फायदे बताए गए और मेने उस दिन से अपने खेत में पराली प्रबंधन करना शुरू किया और 2018 में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग फतेहाबाद हरियाणा से जारी स्कीम कस्टम हायरिंग सेंटर में कुछ यंत्र लिए और गांव हसंगा में काफी किसानों के खेतों में पराली प्रबंधन किया और 2021 में बेलर मशीन से गांठें बनानी आरंभ की।
-किसान सूरजभान।