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सरकारी अस्पताल के क्वार्टर भी जर्जर, घबराए एक परिवार ने छोड़ा आवास

Fri, 05 Aug 2016 12:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहाबाद
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सरकारी अस्पताल के कर्मचारियों की रिहाइशी बस्ती । - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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अमित रूखाया। सरकारी अस्पताल में महिला वार्ड के हादसे के बाद अब शायद सरकारी अस्पताल के कर्मचारियों के सरकारी आवास के बाशिंदों को अपनी चिंता सताने लगी है। ये रिहाइशी क्वार्टर भी जर्जर हालात में हैं लेकिन बार-बार शिकायत के बावजूद अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है। नतीजतन अस्पताल के कर्मचारी अब इन रिहाइशी सरकारी आवासों से पलायन करने लगे हैं। इसी कॉलोनी में रहने वाली एक कर्मचारी संतोष देवी ने परिवार की सुरक्षा के लिए निशुल्क मिले इस सरकारी आवास को छोड़कर चली गई हैं।


गेट टूटे, दीवारें कंडम, छत और छज्जे गिर सकते हैं कभी भी
अस्पताल के बिल्कुल साथ लगती कबीर बस्ती रोड पर बने इन रिहाइशी क्वार्टरों की बदहाल अवस्था का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस कालोनी में बने अधिकतर क्वार्टरों के गेट टूट चुके हैं, दीवारें कंडम हो चुकी हैं और घरों की छतें और छज्जे भी बिल्कुल गिरने की हालत में हैं। लोगों की मानें तो कई आवास तो ऐसे हैं जिनका ये नहीं पता कि कब गिर जाएं। खासकर बारिश के मौसम मे इनकी परेशानी बढ़ जाती है। कई क्वार्टरों में बारिश का पानी छत से टपकने भी लगा है। जिसके चलते यहां रहने वाले सरकारी अस्पताल के कर्मचारी दहशत के साए में जिंदगी काट रहे हैं।
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सड़क गायब, बारिश में घरों में घुस जाता है पानी
इन रिहाइशी क्वार्टरों को बने तकरीबन 35 साल हो चुके हैं। स्थानीय कर्मचारियों की मानें तो तबसे यहां पर सड़क रिपेयर नहीं की गई है। बारिश की मार से बेहाल सड़क अब लगभग यहां से गायब ही हो चुकी है। कुछेक जगहों पर सड़क की पट्टी सी नजर आती है। बारिश के दिनों में यहां पर लगभग एक-एक फुट तक जलभराव होना आम बात है। कई बार तो बरसात का पानी घरों में भी घुस जाता है।


अस्पताल के कर्मचारियों की जुबानी, उनकी बदहाल की कहानी

‘पिछले कई सालों से यहां रह रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती। प्रशासन की ओर से अब तक एक बार भी रिपेयरिंग नहीं कराई गई है। हम लोग अपने खर्च पर ही मरम्मत कराते रहते हैं। हालांकि कम तनख्वाह में ये बार बार कैसे मुमकिन हो।’
-अनिल, कर्मचारी, स्वास्थ्य विभाग एवं रिहाइशी क्वार्टर निवासी।

‘कई बार स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को शिकायत दे चुके हैं लेकिन बावजूद इसके कोई सुनवाई नहीं होती है। कई बार तो मानो ऐसा लगता है जैसे अधिकारी अस्पताल के बाद अब यहां पर भी किसी हादसे का इंतजार कर रहे हैं।’
राहुल, रिहाइशी क्वार्टर निवासी।

‘पूरी कॉलोनी में जगह-जगह बड़ी-बड़ी घास उग आई है। बारिश के दिनों में कई बार सांप भी निकल आते हैं। सड़क शुरू में बनी थी लेकिन अब वह भी गायब हो गई है। एक बार बनी तो उसके बाद कभी उसकी मरम्मत नहीं कराई गई। घरों के अंदर भी कई जगह सीमेंट और प्लास्टर गिरता रहता है।’
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-विमला, रिहाइशी क्वार्टर निवासी।

‘घरों के दरवाजों का बुरा हाल है। ताला भी लगा दें तो भी सुरक्षित नहीं हैं। रात को लाइट की व्यवस्था नहीं है, जिसके चलते सुरक्षा को लेकर भी चिंता लगी रहती है। अब तो अस्पताल प्रशासन हमारी सुध ले ले।’
संतोष, रिहाइशी क्वार्टर निवासी।

‘पहले सरकारी अस्पताल की रिपेयरिंग कराई जाएगी, इसके बाद रिहाइशी क्वार्टरों के लिए भी लोक निर्माण विभाग को लिखा जाएगा।’
-डॉ. अशोक चौधरी, सिविल सर्जन, फतेहाबाद ।
 
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