। बीते दिन सामान्य अस्पताल के जनाना वार्ड में छत से मलबा गिरने से दो दिन के नवजात ने तो अपनी जिंदगी गवां दी, लेकिन इस पूरे अस्पताल में कहीं कोई भी मरीज सुरक्षित नजर नहीं आता। हालात इस कदर बदतर हो चले हैं कि पूरा अस्पताल ही खंडहर की तरह लगने लगा है। हालांकि दीवारों और छतों पर रंगों की पुताई कर इसकी कमजोरी को ढंकने के प्रयास किए जाते रहे हैं लेकिन बावजूद इसके अभी भी सामान्य अस्पताल का कोई हिस्सा सुरक्षित नहीं है। चाहे वो अस्पताल का इंट्री गेट हो या फिर विभिन्न वार्डों को जाने वाला कॉरिडोर। हर तरफ दीवारों और छतों से झांकती दरारें ही नजर आती हैं।
महिला वार्ड का कॉरिडोर की छत भी उखड़ी
महिला वार्ड को जाने वाले कॉरिडोर की छत भी उखड़ चुकी है। छत की दरार को लोहे की पत्ती से भरने का प्रयास किया गया था, लेकिन वो लोहे की पत्ती भी छत से अपनी पकड़ खो चुकी है और किसी भी समय गिर सकती है। इस कॉरिडोर से रोजाना सैकड़ों मरीजों और अस्पताल कर्मचारियों का आना-जाना होता है जो किसी भी बड़े हादसे का शिकार हो सकते हैं।
इमरजेंसी की छत में भी दिखने लगी मोटी-मोटी दरारें
अस्पताल के इमरजेंसी से निकलकर विभिन्न वार्डों को जाने वाले प्रांगण की छत से कई मोटी-मोटी दरारें निकलनी शुरू हो गई हैं। इस प्रांगण में आजकल रोजाना सैकड़ों लोग मौजूद रहते हैं। ऐसे में कभी भी दर्दनाक हादसा हो सकता है।
24 घंटे खुला रहता है बिजली सिस्टम का दरवाजा
सरकारी अस्पताल को बिजली सप्लाई करने वाले बिजली सिस्टम का शटर 24 घंटे खुला रहता है। अंजाने में कोई छोटा बच्चा या कोई और इसके अंदर जा सकता है, जहां खुले बिजली के फेस और स्विच मौजूद हैं। इसके अलावा किसी अन्य हादसे के कारण भी यहां की तारों से इमारत को नुकसान पहुंच सकता है।
इमरजेंसी की दीवारों में सीलन, कभी भी बन सकती है हादसे का कारण
महिला वार्ड की छत गिरने के पीछे अस्पताल प्रशासन की ओर से छत में मौजूद नमी को कारण बताया गया है। कुछ ऐसा ही हाल इमरजेंसी विभाग की दीवारों का भी है। इसकी बाहरी दीवार पर सीलन आ चुकी है। ऐसे में ये दीवार भी हादसे का सबब बन सकती है।
छज्जा भी गिरने के कगार पर
सरकारी अस्पताल के प्रांगण में घुसते ही जिस गेट से इमरजेंसी की ओर जाया जाता है। उसका छज्जा किसी भी समय गिर सकता है। भय की बात तो ये भी है कि इसी छज्जे के बिल्कुल नीचे अक्सर मरीजों के तीमारदार रहते हैं। गिरने की कगार पर खड़ा ये छज्जा भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
'अस्पताल के जो हिस्से पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं, उनकी मरम्मत करवाई जाएगी।
डॉ. अशोक चौधरी, सिविल सर्जन, फतेहाबाद ।