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फतेहाबाद सीआईए टीम की गाड़ी ने मारी थी परिवार को टक्कर

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रतिया पुलिस द्वारा बरामद की गई सीआईए स्टाफ की गाड़ी। - फोटो : Fatehabad
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फतेहाबाद/रतिया। रतिया के गांव हमजापुर के पास पैदल जा रहे एक परिवार के चार लोगों को टक्कर मारने वाली गाड़ी की पहचान हो गई है। यह सूमो गाड़ी फतेहाबाद सीआईए स्टाफ टीम की थी। शनिवार को इस गाड़ी के बारे में रतिया पुलिस को जानकारी मिली और पुलिस ने गाड़ी को कब्जे में लिया। सूमो गाड़ी के चालक ईएचसी रणजीत सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं, मौके पर घायलों को सड़क पर ही छोड़कर जाने और हादसे के करीब 24 घंटे बाद तक भी थाने से लेकर एसपी तक इसकी जानकारी नहीं पहुंचाने से गाड़ी में सवार पुलिसकर्मियों की भूमिका पर सवालिया निशान लग गया है।
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फिलहाल एसपी सुरिंद्र भोरिया ने गाड़ी सवार पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दे दिए हैं। एसपी ने स्पष्ट कहा है कि यदि जांच में गाड़ी सवार पुलिसकर्मियों द्वारा किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी में चूक बात सामने आई तो जिम्मेदार किसी भी पुलिसकर्मी को नहीं बख्शा जाएगा। गौरतलब है कि गांव हमजापुर के पास एक परिवार बाइक रेहड़ी पर सवार होकर फतेहाबाद की ओर आ रहा था। रास्ते में उक्त परिवार को वीरवार रात पुलिस की गाड़ी ने टक्कर मार दी। इस हादसे में जग्गा सिंह की मौत हो गई जबकि तीन दो अन्य राजो देवी व मोनू घायल हो गए। एक महिला अंगूरी देवी कच्ची जगह पर गिरने से चोटिल होने से बच गई। अंगूरी देवी ने बताया था कि टक्कर मारने वाली गाड़ी पुलिस या एंबुलेंस जैसी थी। इसके बाद रतिया पुलिस ने दिनभर हादसे का कारण बनी गाड़ी की तलाश की, लेकिन देर रात तक न तो थाने में इसकी जानकारी थी और न ही एसपी को। शुक्रवार दोपहर को पुलिस की गाड़ी की पहचान हुई और रतिया पुलिस ने कार्रवाई शुरू की।
रतिया एसएचओ बोले- कुछ दूरी पर खड़ी थी गाड़ी, एंबुलेंस का प्रबंध करवाया
रतिया शहर थाना के एसएचओ रुपेश चौधरी ने कहा कि सड़क हादसे में टक्कर मारने वाली गाड़ी फतेहाबाद सीआईए स्टाफ की पाई गई है। यह गाड़ी पंजाब में किसी आरोपी को रिमांड पर लेकर गई हुई थी और फतेहाबाद जा रही थी। चूंकि गाड़ी में मुलजिम था, इसलिए सुरक्षा के नजरिये से हादसे के बाद गाड़ी सवार पुलिसकर्मियों ने कुछ दूरी पर जाकर गाड़ी को रोक लिया था और एंबुलेंस का प्रबंध करवाकर घायलों को अस्पताल भेजा था।
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पुलिस के पास नहीं है इन सवालों के जवाब
1. रतिया शहर थाना के एसएचओ रूपेश चौधरी कहते हैं कि फतेहाबाद सीआईए स्टाफ पुलिस की जिस गाड़ी से हादसा हुआ उस गाड़ी में मुलजिम था और कुछ दूरी पर जाकर पुलिस टीम ने गाड़ी रोककर खुद एंबुलेंस का प्रबंध करवाया, लेकिन दूसरी तरफ एफआईआर के अनुसार घायलों के साथ मौजूद अंगूरी देवी को फोन करके मदद लेनी पड़ी।
2. हादसे के बाद यदि गाड़ी सवार पुलिसकर्मियों ने घायलों की मदद की और उन्हें एंबुलेंस से अस्पताल भेजा तो फिर आधी रात को हुए इस सड़क हादसे की जानकारी उक्त पुलिसकर्मियों ने शहर थाना या एसपी को क्यों नहीं दी?
3. पूरा दिन मीडिया से लेकर पुलिस तक गाड़ी के बारे में पड़ताल करने को लेकर जुटे रहे, एसपी तक से जानकारी लेने पर गाड़ी की पहचान नहीं पता चली, ऐसे में इतने वक्त तक पुलिस गाड़ी को लेकर पुलिसकर्मी क्यों गायब रहे?
4. शहर थाना एसएचओ के अनुसार पुलिसकर्मियों ने एंबुलेंस के लिए फोन किया लेकिन एंबुलेंस कंट्रोल रूम में दर्ज नंबर और नाम पुलिसकर्मी का न होकर किसी नागरिक का है।
5. शिकायतकर्ता अंगूरी देवी के अनुसार हादसे के बाद किसी तरह फोन करके उसने अपने मामा के लड़के हैप्पी को सूचना दी और हैप्पी ने आकर जग्गा सिंह, राजो व मोनू को साधन का प्रबंध करके अस्पताल पहुंचाया था।
कोट
गांव हमजापुर के पास सड़क पर परिवार को टक्कर मारने वाली गाड़ी की पहचान फतेहाबाद सीआईए स्टाफ की गाड़ी के तौर पर हुई है। गाड़ी पंजाब से फतेहाबाद आ रही थी। इस गाड़ी के चालक के खिलाफ कार्रवाई की गई है। जिम्मेदारी से भागने और हादसे के बारे में देरी से बताने पर गाड़ी सवार सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच में जो भी पुलिसकर्मी दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
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- सुरिंद्र भोरिया, एसपी, फतेहाबाद
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