कंडम एंबुलेंस गाड़ियों और स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था के कारण जिले में मरीजों का हाल बदहाल है। हालात इस कदर बिगड़े हैं कि मरीजों को अस्पताल पहुंचने के लिए या तो निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है या फिर इन कंडम वाहनों में। इस लापरवाही का फायदा सीधे तौर पर निजी एंबुलेंस संचालक उठा रहे हैं और आम आदमी की जेब काट रहे हैं।
हालांकि तीन नई एंबुलेंस मिली हैं लेकिन कागजी कार्रवाई पूरी न होने से अभी तक ऑन रोड न होने के कारण हालात जस के तस ही बने हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस सेवा के संचालक कुलदीप कुमार के मुताबिक जिले के सरकारी अस्पतालों में इस समय कुल 14 एंबुलेंस वाहन हैं। इसमें से तीन को कंडम हालात में ही चलाया जा रहा है। ये तीनों वाहन आए दिन तकनीकी खराबी के कारण यहां-वहां खड़ी हो जाती हैं। अमर उजाला पड़ताल में सामने आया है कि 14 में से महज ये तीन ही नहीं बल्कि ज्यादातर वाहनों की स्थिति ठीक नहीं है। कागजों में भले ही कंडम घोषित नहीं किया गया है लेकिन उनकी वास्तविक स्थिति कंडम जैसी ही है। टोहाना जैसे बड़े स्टेशन की एक नई एंबुलेंस पहले ही रतिया भेजी जा चुकी है, इससे टोहाना में अभी पुरानी और खटारा एंबुलेंस के सहारे काम चलाया जा रहा है।
नई गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन नहीं स्वास्थ्य विभाग ने जिले के लिए तीन नई एंबुलेंस भेज दी हैं लेकिन एक माह के बाद भी उनके रजिस्ट्रेशन का काम पूरा नहीं हो पाया है। रजिस्ट्रेशन न होने के कारण विभाग अभी तक इन्हें ऑन रोड नहीं ला पाया है। सूत्रों के मुताबिक एंबुलेंस के लिए सरकार से मिलने वाली रजिस्ट्रेशन फीस में छूट के मामले पर बात अटकी है। हालांकि एंबुलेंस सेवा संचालक कुलदीप का दावा है कि जल्द ही तीनों नए वाहन सड़कों पर होंगे। नई मिली तो पुरानी जाएंगी जिला स्वास्थ्य विभाग को तीन नई एंबुलेंस मिली हैं। अभी इसके लिए कागजी कार्रवाई चल रही है, जल्द ही यह अस्पताल प्रशासन के सुपुर्द हो जाएंगी। लेकिन इन तीन गाड़ियों से भी कोई असर होता नहीं दिख रहा है, कारण स्वास्थ्य विभाग तीन कंडम एंबुलेंस को बेड़े से बाहर करने की तैयारी में है।
इससे हालात फिर से पहले जैसे ही रहेंगे। निजी एंबुलेंस चालक उठाते हैं फायदा सामान्य अस्पताल और स्वास्थ्य विभाग की इस लापरवाही का फायदा निजी एंबुलेंस चालक उठा रहे हैं। अक्सर देखने में आता है कि एक साथ कई मामले आने पर स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस नहीं मिल पाती। ऐसे में मरीजों को मजबूरी में निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ता है। इसके लिए मरीजों के तीमारदारों को मोटी राशि चुकानी पड़ती है, जबकि विभाग की सेवा निशुल्क है। कोट्स ‘तीन नई एंबुलेंस आ चुकी हैं, जल्द ही इन्हें ऑन रोड उतारा जाएगा। नई एंबुलेंस आने से स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने की दिशा में मदद मिलेगा।’ - डा. अशोक चौधरी, सिविल सर्जन, फतेहाबाद।