फतेहाबाद में पराली जलाने की रोकथाम के लिए किसानों के बीच जागरूक करने पहुंच रहे अधिकारियों को खरी-खोटी सुननी पड़ रही है। शुक्रवार को कुलां में जागरूक करने पहुंचे टोहाना के एसडीएम प्रतीक हुड्डा के समक्ष किसानों ने पराली की गांठें नहीं बिकने पर रोष जताया। साथ ही उन्होंने एसडीएम को चेतावनी दी कि अगर 10 दिन में पराली की गांठें नहीं बिकीं तो आपके सामने ही पराली जलाएंगे। तैयारी करके आ जाना।
वहीं, पराली जलाने से किसानों को रोकने के लिए प्रशासन ने निगरानी भी बढ़ा दी है। एसडीएम स्तर के अधिकारी से लेकर उपनिदेशक तक मैदान में उतर गए हैं। जिन क्षेत्रों में कटाई चल रही है, उनमें अधिक निगरानी की जा रही है।
वहीं किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान व पराली प्रबंधन के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से प्रशासन द्वारा जागरूकता के लिए प्रभात फेरी निकाली गई। प्रशासनिक अधिकारियों के साथ सामाजिक-धार्मिक, किसान संगठनों, युवाओं, जनप्रतिनिधियों ने शामिल होकर फसल अवशेष प्रबंधन व पराली नहीं जलाने का संदेश दिया। टोहाना से शुरू हुईं प्रभात फेरी गांव जमालपुर शेखा, अकावाली, कुलां, इंदाछोई और चंदड़ कलां में गई।
भूना में खरीद केंद्र होने के बावजूद नहीं बिक रही पराली
दरअसल, भूना में पराली खरीद केंद्र होने के बावजूद वहां पराली की खरीद नहीं हो रही है। इससे किसानों से पराली खरीदने में लगे बेलरों को मजबूरन अधिक खर्च व समय बर्बाद कर दूर दराज के शहरों में पराली बेचने जाना पड़ता है। इस समस्या के चलते कई बेलर संचालकों ने इस काम से दूरी बना ली है। बेलर संचालकों की मांग है कि प्रशासन जिले में ही पराली विक्रय की व्यवस्था सुनिश्चित करें। बेलर संचालकों द्वारा किसानों के खेतों से पराली की गांठें नहीं ले जाने से क्षेत्र के किसानों के समक्ष भी परेशानी हो गई है।
कुलां में जागरूकता शिविर में आए एसडीएम प्रतीक हुड्डा के सामने किसानों और बेलर संचालकों ने यह समस्या रखी। इस दौरान पगड़ी संभाल जट्टा किसान संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि पराली जलाना उनका शौक नहीं है, लेकिन इस समय पराली का कोई खरीदार नहीं है। किसानों को कई-कई दिन खेतों से पराली बेचने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
अगली फसल बुआई के लिए किसानों को खेतों में जल्द पराली का निपटान करना होता हैं। बड़े जमींदार अपने यंत्रों से प्रबंधन कर वाहनों या उनके खेतों से सीधे कंपनियां आकर पराली खरीद कर रही हैं, लेकिन छोटे किसानों के खेतों से बेलर संचालक ही पराली खरीद करते हैं। एसडीएम प्रतीक हुड्डा ने कहा कि इस समस्या के बारे में पत्र प्रेषित कर उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया है। इसका समाधान करना सरकार का काम है।
पांच और स्थानों पर जली पराली, अब तक आए 99 मामले
जिले में पांच और स्थानों पर पराली जलाई गई है। अब पराली जलाने के मामले बढ़कर 99 हो गए हैं। इनमें से 87 फायर लोकेशन हरसैक द्वारा भेजी गई है जबकि 12 जानकारियां अन्य माध्यमों से मिली है। कृषि विभाग ने पराली जलाने के मामलों में 61 किसानों को 155000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
पिछले चार वर्षों के दौरान जिले में 305 स्ट्रा बेलर मशीन किसानों द्वारा खरीदी गई हैं। इस समय जिले में सुपर सीडर मशीन 1921 किसानों के पास हैं। अगर किसान इन मशीनों का उचित शेड्यूल के साथ उपयोग करें पराली जलानी नहीं पड़ेगी। किसान खेत में पराली न जलाकर इन मशीनों द्वारा सीधे रबी फसलों की बिजाई कर सकते हैं।
-प्रतीक हुड्डा, एसडीएम, टोहाना