रतिया क्षेत्र के गांव रतनगढ़ में पाकिस्तान से आकर रह रहे हिंदू परिवारों को अभी तक यहां की नागरिकता नहीं मिली है। हालांकि उनके दस्तावेजों को जांचने के लिए अधिकारियों की टीम गांव रतनगढ़ का दौरा भी कर चुकी हैं। वर्ष 2017 में भी टीम गई थी। वहां पाकिस्तानी हिंदुओं के दस्तावेजों की जांच पड़ताल की। विभाग की टीम ने सभी पाकिस्तानी हिंदुओं की विस्तृत रिपोर्ट उच्चाधिकारियों के पास भेज दी थी। इस मुद्दे को लेकर इन परिवारों के प्रतिनिधि डबाया राम वीरवार को फिर उपायुक्त से मिले। अपनी समस्याएं बता समाधान की मांग रखी।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2000 में पाकिस्तान से कुछ परिवार एक विवाह समारोह में शामिल होने के लिए रोहतक में आए थे। इसके बाद पाकिस्तान से आए हिंदू परिवार रोहतक में ही बस गए थे। इन परिवारों के रोहतक में रहने के दौरान राशन कार्ड आदि प्रशासन द्वारा बनाए गए थे। बाद में इनमें से कुछ परिवार गांव रतनगढ़ में आ गए थे तथा यहीं रहने लगे थे। इस दौरान इन परिवारों के सदस्यों के राशन कार्ड को प्रशासन ने काट दिया। इन परिवारों की बच्चों की शादियां भारतीय परिवार में हो गई और उनकी संतानें भी यहीं पैदा हुईं। बाद में इनके राशन कार्ड काट दिए गए। इसको लेकर परिवार के मुखिया डबाया राम व अन्य सदस्यों ने करीब तीन साल पहले सरकार व प्रशासन के उच्च अधिकारियों को मिलकर आग्रह किया था कि उनके राशन कार्ड यहीं पर दोबारा बनाए जाएं। फिलहाल उनके पास भारत की नागरिकता भी नहीं है। ऐसे में उनके दस्तावेज नहीं बना जा रहे। डबाया राम ने बताया कि वे भारत को अपना घर मानते हैं। सरकार ने नागरिकता संशोधन बिल भी पास कर दिया है। इसके बावजूद उन्हें यहां की नागरिकता नहीं मिली है। नागरिकता न होने के उन्हें सरकार की तरफ से कोई भी सुविधा नहीं मिल रही। किसी भी योजना का लाभ नहीं ले पा रहे। उनकी यहां कोई पहचान ही नहीं हैं।
कोट
इस परिवार को नागरिकता देने की कानूनी प्रक्रिया चल रही है। नागरिकता देने के लिए चंडीगढ़ से दो टोकन मंगवाए गए हैं, जो इस प्रक्रिया का हिस्सा हैं। इस प्रक्रिया में तेजी से काम हो रहा है।
अंकिता वर्मा, सीटीएम, फतेहाबाद।