हरियाणा के फतेहाबाद में रतिया के पूर्व एसडीएम भारत भूषण कौशिक सहित छह आरोपियों पर हिसार विजिलेंस द्वारा दर्ज किए गए भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के केस की जांच को रोहतक विजिलेंस के पास ट्रांसफर करने के आदेश जारी हुए हैं। हिसार विजिलेंस की जांच में खामियों की बात सामने आई है।
इन खामियों के चलते गिरफ्त से बाहर रहे आरोपियों को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने पर उच्चाधिकारियों ने नाराजगी जताई है। इसके बाद अब केस को हिसार विजिलेंस से लेकर रोहतक विजिलेंस को भेजने के आदेश दिए गए हैं। डीएसपी रोहतक के नेतृत्व में एसआईटी का गठन करके इस केस की जांच आगे बढ़ाई जाएगी।
गौरतलब है कि हिसार विजिलेंस ने रतिया में पांच कनाल 16 मरले जमीन की रजिस्ट्री के मामले में 24 दिसंबर को रतिया के तत्कालीन एसडीएम भारतभूषण कौशिक व उनकी पत्नी सारिका, नायब तहसीलदार भजनलाल, पटवारी मदनलाल, बर्खास्त पुलिसकर्मी बाला सिंह व बाला सिंह की पत्नी कर्मजीत कौर के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप में केस दर्ज किया था।
सिर्फ पटवारी को ही गिरफ्तार कर पाई थी हिसार विजिलेंस
हिसार विजिलेंस ने इस मामले में केस दर्ज करने के बाद केवल पटवारी की गिरफ्तारी की जबकि अन्य आरोपियों तक विजिलेंस नहीं पहुंच पाई। अन्य सभी आरोपियों को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई। अंतरिम जमानत मिलने के पीछे उच्चाधिकारी मानते हैं कि विजिलेंस केस को मजबूती से कोर्ट के सामने इसलिए नहीं रख पाई क्योंकि केस बनाने व जांच में कई खामियां रहीं।
इसके अलावा एक बड़ी वजह यह भी है कि विजिलेंस ने इस मामले में जमीन की विक्रेता को अभी तक आरोपी नहीं बनाया जबकि प्रॉपर्टी के सौदे में नगर परिषद से एनओसी लेने की जिम्मेदारी विक्रेता की थी। वहीं, दूसरी तरफ मुख्य सचिव ने डीसी फतेहाबाद को पूर्व एसडीएम भारत भूषण कौशिक के विरुद्ध सर्विस रुल्ज के तहत चार्जशीट ब्योरा बनाकर केस मुख्यालय को भेजने के निर्देश दिए हैं।