फतेहाबाद। मातुराम कॉलोनी में पोते द्वारा अपनी ही सगी दादी के सीने में हथियार से वार करके हत्या करने की सनसनीखेज वारदात के बारे में जिसने भी सुना हतप्रभ रह गया। नागरिक अस्पताल में पोस्टमार्टम कक्ष के बाहर अंदर अपनी मृत पत्नी के शरीर को रखवाकर बाहर अपने बेटे-बहू और पोते के खिलाफ पुलिस को बयान देने वाले रामअवतार की मनोदशा को समझना काफी मुश्किल था। रूंधे गले से वो बता रहे थे कि इसी पोते को उसकी दादी ने अपनी गोद में खिलाया था। जब इसका जन्म हुआ था तो वो अक्सर उसे गोद में उठाकर बाहर घुमाने ले जाती थी, लेकिन उसे क्या पता था कि जिसे वो गोद में खिला रही है, एक दिन वो ही उसके सीने में खंजर घोंप देगा।
रामअवतार ने बताया कि उसका पोता विक्की शुरू से ही थोड़ा गुसैल स्वभाव का रहा है, लेकिन उसे इस बात की उम्मीद नहीं थी कि उसका ये गुस्सैल स्वभाव एक दिन उसके परिवार की ही खुशियां ही तबाह कर देगा। उधर दूसरी ओर मृतका रामदेवी की मौत से उसके पति और परिवार की खुशियां तो उजड़ ही गई हैं, साथ ही आरोपी पोते विक्की और उसके परिवार के सामने भी अब दुखों का पहाड़ आना तय है। इस केस में पुलिस ने विक्की के साथ उसके पिता जयकुमार व माता निर्मल देवी को आरोपी बनाया है और विक्की और निर्मल को गिरफ्तार भी कर लिया है। लेकिन इस सारे घटनाक्रम में ना तो पोते विक्की ने अपने नवजात बच्चे के बारे में सोचा, जिसके लिए रखे नामकरण समारोह में नहीं आने पर उसने अपनी दादी को मौत के घाट उतार दिया। उसके जेल जाने के बाद विक्की के नवजात बच्चे और उसकी मां के सामने भी अब दुखों का पहाड़ ही आएगा। उधर दूसरी ओर पोते द्वारा अपनी ही दादी का कत्ल किए जाने की खबर मातुराम कालोनी में फैली। पड़ोसियों का कहना है कि उन्हें तो इस बात का यकीन तक ही नहीं हुआ कि कोई गुस्से में इतना अंधा भी हो सकता है कि वो अपनी ही दादी की ही हत्या कर देगा।
यह कहना है मनोरोग विशेषज्ञ का
मनोरोग विशेषज्ञ एवं डिप्टी सिविल सर्जन डा. गिरीश के अनुसार गुस्से के आवेश में ऐसा कदम उठाया जा सकता है, लेकिन हत्या गुस्से की इंतहा मानी जा सकती है। उनके अनुसार ऐसा संभव है कि वो पिछले कई दिनों से घर-परिवार के बीच होने वाली छोटी-छोटी बातों को मन में दबाए बैठा हो और उसकी खुशी के दिन जब दादी और दादा समारोह में शामिल नहीं हुए तो उसके मन का गुबार फूट गया हो और आवेश में उसने ये कदम उठा लिया।