जिला एडीआर सेंटर में बाल विवाह निषेध विषय पर सेमिनार की अध्यक्षता करती मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी
फतेहाबाद। जिला एडीआर सेंटर में बाल विवाह निषेध विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एवं जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण की सचिव गायत्री ने की।
सीजेएम गायत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बाल विवाह को एक अभिशाप है, क्योंकि यह बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन करता है और उनके विकास को बाधित करता है। स्कूल अध्यापिकाएं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा वर्कर्स व स्वास्थ्य सहायिकाएं समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो बाल विवाह जैसे अभिशाप को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसलिए बाल विवाह को समाज से मुक्त करने में अपनी मुख्य भूमिका निभाएं और बाल विवाह की प्रथा का अंत करने में सहयोग करें।
कार्यक्रम में नागरिक अस्पताल मेडिकल ऑफिसर डॉ. हेमंत सोनी ने बताया कि बाल विवाह के कारण मातृ एवं शिशु मृत्यु दर ज्यादा है। बाल विवाह के कारण कम उम्र की मां एवं बच्चे दोनों का स्वास्थ्य खतरे में पड़ जाता है। जिला बाल संरक्षण अधिकारी सुरजीत बाजिया ने बताया कि बाल विवाह को प्रोत्साहित करने वाले कुछ कारणों में गरीबी, दुल्हन की कीमत, दहेज, सांस्कृतिक परंपराएं, धार्मिक और सामाजिक दबाव, क्षेत्रीय रीति रिवाज, बच्चों के व्यस्क होने तक अविवाहित रहने का डर है, अशिक्षा शामिल हैं।