फतेहाबाद। अप्रैल के अंत में प्रशासन द्वारा पशु मेले को गर्मी का मौसम होने के चलते एक माह के लिए बंद किया गया था। इसके बाद बाढ़ आ गई और अब बाढ़ का पानी निकलने के बावजूद भी पशु मेला आरंभ नहीं किया जा रहा है। इस बात को लेकर पशु व्यापारी व किसान परेशान हैं और मंगलवार को पशु मेला आरंभ करने की मांग को लेकर उन्होंने लघु सचिवालय के आगे धरना भी दिया। इस धरने को शहर के अनेक पार्षदों ने अपना समर्थन दिया है।
फतेहाबाद के रतिया रोड पर गांव अयाल्की के पास पशु मेला लगाया जाता है। 30 अप्रैल 2023 को प्रशासन ने यह मेला गर्मी के मौसम को देखते हुए डेढ़ माह के लिए बंद करवा दिया था। डेढ़ माह बाद यहां मेला लगना था, लेकिन उसके अटकाए रखा गया। इसके बाद जुलाई माह में बाढ़ आने के कारण मेला करीब डेढ़ माह बंद रहा, लेकिन अब बाढ़ का पानी निकल चुका है और धरती भी सूख चुकी है, लेकिन पशु मेला आरंभ नहीं किया जा रहा है। जिसको लेकर पशु व्यापारी व किसान परेशान हैं।
पशु व्यापारी संघ व किसान संगठन के अध्यक्ष मोहरी लाल बताते हैं कि इस मेले से अनेक लोगों का रोजगार चलता है। यहां हर सप्ताह पशुओं को लोड करने के लिए 300 से 400 छोटी गाड़ियां, 50 के करीब कैंटर व ट्रक आते हैं और ट्रक चालकों के लिए यह रोजी रोटी का बड़ा साधन है। इसके अलावा यहां पर चाय वाले, टैंट वाले, आए हुए व्यापारियों व किसानों को पानी पिलाने वाले कुर्सी व चारपाई किराए पर देने वाले पहुंचते हैं और सप्ताह भर की कमाई करके जाते हैं। मेला बंद होने के कारण पशु व्यापारियों से लेकर सभी का रोजगार लगभग समाप्त हो गया है।
दूसरे जिले में किसान की कटती है 9 हजार की पर्ची
मोहरी राम ने बताया कि फतेहाबाद से अगर कोई किसान अपना पशु बेचने के लिए सिरसा या हिसार के निजी मेलों में जाता है तो उसकी 9 हजार रुपये की पर्ची कटती है। यहां पर मात्र 100 रुपये की एंट्री फीस व पशु बिकने के बाद में 300 रुपये लिखित की लगती है। मेला बंद होने से सरकार को प्रति सप्ताह 15 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है, लेकिन प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा। उन्होंने बताया कि वह इस मामले उपायुक्त, डीडीपीओ, जिला परिषद के सीईओ से कई बार मिल चुके हैं। सीईओ ने तो ऑर्डर भी जारी कर दिए थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब भी उनको कोई ठोस जवाब नहीं मिल रहा है। मजबूरन उनको धरना देना पड़ा है।
पार्षदों ने भी दिया समर्थन
पशु व्यापारियों द्वारा दिए गए धरने का मंगलवार को शहर के नगर पार्षद मोहनलाल नारंग, चंद्रभान वधवा, पार्षद प्रतिनिधि हंसरोज योगी, कपिल कुमार व निर्मल सिवाच ने भी समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि पशु मेला शुरू होना चाहिए, क्योंकि इससे कई लोगों की रोजी रोटी चलती है।
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मैं अभी ही फतेहाबाद में ट्रांसफर होकर आया हूं। पशु मेले को उपायुक्त ने बंद करने के निर्देश दिए थे। जबसे मैं यहां आया हूं, ऐसे कोई आदेश नहीं आए कि पशु मेला आरंभ किया जाए। इसके लिए डीएलसीसी तय करती है कि पशु मेला कब आरंभ करना है। जैसे ही सरकारी आदेश आएंगे, मेला आरंभ कर दिया जाएगा।
-अनिल कुमार, बीडीपीओ, फतेहाबाद।