फतेहाबाद। सहकारी बैंक में सीसीटीवी और आग बुझाने के यंत्र खरीदने को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया है। तत्कालीन बैंक महाप्रबंधक ने दो लेखाकारों के साथ मिलकर तबादले के दिन ही चहेती फर्म को टेंडर जारी कर दिया और इसके दो दिन बाद रिलीव होने के दिन एजेंसी को 25 लाख का भुगतान भी कर दिया गया। इस मामले में शहर पुलिस ने सहकारी बैंक के चेयरमैन नरेश कुमार तनेजा और निदेशक मनीराम की शिकायत पर आरोपी तत्कालीन बैंक महाप्रबंधक दीपक मोर, लेखाकार विपिन बैनीवाल और राजपाल हुडा के खिलाफ धोखाधड़ी और पीसी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस को दी शिकायत में चेयरमैन नरेश कुमार ने बताया कि बैंक में सीसीटीवी और आग बुझाने के यंत्र खरीदने के लिए चार सदस्य कमेटी गठित की गई थी। जिसमें नरेश कुमार, मनीराम, दीपक मोर और विपिन बैनीवाल शामिल थे। बैंक में 28 अप्रैल 2023 को टेंडर खोलने की बैठक हुई, जिसे किसी कारण से स्थगित कर दिया गया। नियमानुसार बैंक महाप्रबंधक दीपक मोर द्वारा दोबारा मीटिंग बुलाने का एजेंडा जारी न करके 6 मई 2023 को एक पत्र भेजकर सूचित किया गया कि दो दिन के अंदर बैंक में आकर खरीद प्रक्रिया में भाग लें। दोनों कमेटी सदस्य 6 मई 2023 और 8 मई 2023 को पत्र लेकर बैंक में गए तो लेकिन वहां महाप्रबंधक न मिलने पर वापस आना पड़ा।
जब स्थापना अधिकारी से इस बारे में पूछा तो उसने बताया कि टेंडर तो महाप्रबंधक व विपिन बैनीवाल द्वारा 8 मई 2023 को जारी कर दिया गया है। जबकि 8 मई 2023 को ही महाप्रबंधक दीपक मोर का तबादला हो चुका था। इसी दिन महाप्रबंधक ने आनन-फानन में नियमों के खिलाफ जाकर सब कमेटी की अवैध मीटिंग की और जिसमें मुझे व निदेशक मनीराम को गैर हाजिर दिखाकर मीटिंग की कार्रवाई लिखकर अपने व विपिन बैनीवाल के हस्ताक्षर करके अपनी चहेती एजेंसी को टेंडर जारी कर दिया।
एजेंसी ने घटिया क्वालिटी का भेजा सामान
शिकायत में बताया गया है कि 8 मई 2023 की बैठक को लेकर जानबूझकर मीटिंग को लेकर एजेंडा नहीं भेजा गया। इसके बाद पता चला है कि 10 मई 2023 को महाप्रबंधक दीपक मोर के तबादले के दिन टेंडर जारी कर उसके दो दिन बाद स्थापना अधिकारी राजपाल ने 25 लाख रुपये का भुगतान फर्म को कर दिया। जबकि बैंक की किसी भी शाखा में एजेंसी द्वारा कोई भी सीसीटीवी व फायर सिस्टम नहीं लगाया गया है। इसके अलावा जिस सामान की खरीद की गई है, वह घटिया स्तर का बताया गया है। पुलिस ने फिलहाल मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मुख्यमंत्री उड़नदस्ते के सामने आया था मामला, फिर दबा दिया गया
सहकारी बैंक में मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने 24 मई को छापे की कार्रवाई को अंजाम दिया था। तब भी ये मामला सामने आया था। लेकिन इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई, मामले को दबा दिया गया। हालांकि मुख्यमंत्री उड़नदस्ते के अधिकारियों का कहना है कि मामले में जांच चल रही थी। मामले की रिपोर्ट मुख्यालय में भेजी गई थी।