गांव मेहूवाला में ठंढ ये बचाव के लिए अलाव सेंकते ग्रामीण।
फतेहाबाद। लगातार दो सप्ताह से चल रही सर्दी ने जन जीवन पर भारी असर डाला हुआ है। कोहरा और बादल छाने से प्रदूषण बढ़ रहा है। रविवार को भी एक्यूआई 208 दर्ज किया गया। जो सांस के रोगियों के लिए खतरे की घंटी है। 100 से ऊपर एक्यूआई को स्वास्थ्य की दृष्टि से अच्छा नहीं माना जाता। ऐसे में डॉक्टर सांस के मरीजों को घर से नहीं निकलने की सलाह देते हैं। लोग सुबह धुंध व इसके बाद चलने वाली शीतलहरों के कारण बेहाल होकर रह गए हैं। भयंकर ठंड का प्रभाव लोगों की दिनचर्या पर भी पड़ रहा है।
रविवार को भी सुबह धुंध व इसके बाद शीतलहर चलती रही और सूर्यदेव के दर्शन नहीं हो पाए। हाड़ कंपाने वाली ठंड के चलते लोग अपने घरों में ही दुबके रहे और बाजारों में आवाजाही काफी कम रही। भर बादल छाए रहने से शीतलहर बढ़ गई और रात होते-होते हाड़ तक कंपा देने वाली सर्दी ने लोगों को परेशान करके रख दिया। जनवरी की शुरुआत से जो ठंड पड़ी है, उसने अब तक पीछा नहीं छोड़ा है। बीच में एक-दो दिन ही धूप ने दर्शन दिए हैं तो अधिकतर दिनों में कोहरा या बादल छाए रहे हैं। फिजिशियन डॉ. मनीष टुटेजा के अनुसार, सांस के मरीजों को इस मौसम में जरूरी होने पर ही बाहर निकलना चाहिए। यदि निकलना हो तो मास्क लगाकर ही निकलें।
दिन का पारा लुढ़ककर 11 डिग्री पर आया
फतेहाबाद में रविवार को अधिकतम तापमान 11 डिग्री व न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दिन भर बादल छाए रहने और शीतलहर चलने से जनजीवन अस्तव्यस्त रहा। मौसम विभाग के अनुसार, 25 जनवरी तक किसी प्रकार की राहत नहीं मिलने वाली है। ठंड से बचने के लिए शहर व गांवों में लोग अलाव जलाकर ठंड से राहत पाने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि यह ठंड गेहूं व सरसों की फसल के लिए काफी फायदेमंद सिद्ध हो रही है। खास तौर गेहूं की फसल के लिए यह मौसम काफी अच्छा बना हुआ है। कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो धुंध व ठंडा मौसम एक तरह से गेहूं की फसल के लिए नाइट्रोजन का कार्य कर रहा है।
कोट
इस बार ठंड का मौसम फसलों के लिए काफी अच्छा रहा है। गेहूं की फसल के लिए धुंध का यह मौसम काफी फायदेमंद है और इससे गेहूं की फसल को काफी फायदा होगा तथा उत्पादन भी अच्छा होगा।
-डॉ. राजेश सिहाग, कृषि उपनिदेशक, फतेहाबाद।