फतेहाबाद। इस सदी का 21वां साल बीतने में मात्र सात दिन बचे हैं। साल भर में प्रदेश सरकार या केंद्र सरकार से जनता को मिलने वाली बड़ी सौगात पर नजर डालें, तो एक स्टेट हाईवे को चौड़ा करने की घोषणा को छोड़कर अभी तक कोई बड़ी सौगात जिले को नहीं मिल पाई है।
सिर्फ, रतिया के ब्राह्मणवाला से भट्टू क्षेत्र के गांव रामसरा तक राजस्थान, हरियाणा व पंजाब को जोड़ने वाले स्टेट हाईवे को चौड़ा करने के लिए रतिया व फतेहाबाद विधानसभा में करीब 285 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। हालांकि, छोटे-छोटे विकास कार्यों के लिए ग्रांट जारी होती रही। दरअसल, आधे से ज्यादा साल तो कोरोना से जंग लड़ने में ही बीत गया। दूसरी लहर का कुछ प्रभाव कम हुआ तो अब नए वेरिएंट ओमिक्रॉन को लेकर चिंता बढ़ गई है। विश्वविद्यालय जैसे उच्च शिक्षण संस्थान का सपना भी इस साल पूरा नहीं हो पाया है।
नए बस स्टैंड को लेकर बेपरवाह सरकार, लाचार प्रशासन
साल 2021 भी प्रदेश के पहले चार मंजिला नए बस स्टैंड के उद्घाटन के इंतजार में निकल गया है। इस प्रोजेक्ट में तो ऐसी स्थिति है कि सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर बेपरवाह को चुकी है जबकि प्रशासन लाचार नजर आ रहा है। जो नया बस स्टैंड जनवरी 2019 में शुरू होना था, वह दिसंबर 2021 तक भी शुरू नहीं हो सका है। वन विभाग के यहां पेयजल व सीवर लाइन डालने के लिए पेड़ काटने की एनओसी की फाइल 11 महीने तक लटकी रही। अब पेयजल लाइन डालने की एनओसी तो मिल गई है, लेकिन सीवर लाइन की फाइल अभी तक अटकी हुई है। दरअसल, शहर को बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था से निजात दिलाने के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 15 दिसंबर 2016 को नए बस स्टैंड की घोषणा की थी। करीब 10 करोड़ रुपये भी मंजूर हुए। अप्रैल 2017 में काम शुरू हुआ। यह बस स्टैंड जनवरी 2019 में तैयार होना था, लेकिन जनवरी 2021 तक सारा काम पूरा हो पाया। दो साल की देरी के बाद भी नए बस स्टैंड को शुरू नहीं किया जा सका है।
ठंडे बस्ते में चली गई टोहाना बस स्टैंड की फाइल
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने ही टोहाना में भी नया बस स्टैंड बनाने की घोषणा की थी। मगर अब यह प्रोजेक्ट भी ठंडे बस्ते में चला गया है। तर्क दिया गया है कि सूटेबल रेट पर सहमति नहीं बनने तथा आसपास कम रेट की जमीन नहीं मिलने के चलते बस स्टैंड का प्रोजेक्ट अब तक सिरे नहीं चढ़ सका है। हिसार रोड बाईपास की जमीन महंगी होने के चलते प्रस्तावित की गई पिरथला माइनर के साथ की जमीन पर अब तक कोई फैसला नहीं हो पाया है।
जेल बनाने की प्रक्रिया भी फाइलों से बाहर नहीं निकली
जिला मुख्यालय पर जेल बनाने के लिए भी प्रक्रिया फाइलों से बाहर नहीं निकली है। हालांकि, बीते दिनों ही प्रशासन ने नेशनल हाईवे पर गांव धांगड़ के पास 74 एकड़ जमीन चिह्नित की थी। सरकार द्वारा इस जमीन की खरीद प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया। अब प्रशासन इस जमीन की बैंकों से डिटेल ले रहा है कि कितनी जमीन पर लोन है और कितनी पर नहीं है। इसके बाद किसानों से रेट पर सहमति करवाई जाएगी। इसके बाद जेल बनाने का प्रोजेक्ट आगे बढ़ेगा।
बैंक स्कवायर बनाने का प्रोजेक्ट भी नहीं चढ़ा सिरे
शहर में बैंकों के पास पार्किंग नहीं होने के कारण शहरवासियों को आए दिन जाम से जूझना पड़ रहा है। ऐसे में सरकार ने बैंक स्कवायर बनाने की घोषणा की थी। बैंक स्कवायर में सभी बैंकों को एक ही स्थान पर जगह उपलब्ध करवाने की योजना है। जहां पार्किंग की भी बेहतर सुविधा होगी। मगर यह प्रोजेक्ट भी सिरे नहीं चढ़ सका है।
कोट
नए बस स्टैंड पर पेयजल लाइन बिछाने का काम शुरू हो चुका है। वन विभाग की एनओसी केंद्रीय मंत्रालय से मिलती है। जेल बनाने के लिए जमीन खरीदने की प्रक्रिया चल रही है। अन्य प्रोजेक्ट्स पर भी काम चल रहा है।
प्रदीप कुमार, उपायुक्त, फतेहाबाद