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जिले में धान की सीधी बिजाई का पायलट प्रोजेक्ट कामयाब, आगे बढ़ने की तैयारी में कृषि विभाग

Wed, 29 Jun 2016 01:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/फतेहाबाद
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फतेहाबाद के पास एक खेत में धान की रोपाई करता किसान परिवार - फोटो : amarujala
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सुरेंद्र असीजा।  पिछले वर्ष नरमे की फसल पर सफेद मक्खी के प्रकोप के चलते इस बार किसानों का रुझान धान की ओर बढ़ गया है। इसके अलावा कृषि विभाग के धान की सीधी बिजाई पर किसानों की मदद करने के चलते किसान सीधी बिजाई में जुट गए हैं। कृषि विभाग की सीधी बिजाई के लिए रखे गए लक्ष्य में विभाग को कामयाबी मिलती दिख रही है। माना जा रहा है कि अगर सीधी बिजाई कामयाब होती है, तो किसान तो मालामाल होंगे ही, साथ में बिजली-पानी और किसान की लागत में भी 30 फीसदी तक कटौती आ सकती है। कृषि अधिकारी इस बात पर एकमत हैं कि सीधी बिजाई किसान के लिए वरदान है।
        फतेहाबाद में बीते वर्ष 88 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की रोपाई की गई थी।

जबकि 79 हजार हेक्टेयर भूमि पर नरमे की बिजाई हुई थी। नरमे में सफेद मक्खी के प्रकोप के चलते किसानों को नरमे का लाभ नहीं मिला, तो इस बार किसानों का मोह नरमे से भंग होकर धान की ओर हो गया। इस बार विभाग ने 95 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की रोपाई और बिजाई का लक्ष्य रखा है। जबकि पिछली बार ये आंकड़ा महज 88 हजार हेक्टेयर था। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान ही रोपे गए धान से किसान को फायदा ज्यादा मिलता है। जबकि इससे पूर्व रोपे गए धान में पानी की खपत अत्यधिक होती है।
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किसान अपने संसाधनों से सिंचाई करता है, तो खर्च भी अधिक बैठता है और भूजल दोहन भी होता है। पानी और बिजली की बचत को लेकर कृषि विभाग ने इस बार धान की सीधी बिजाई पर बल दिया। विभाग ने सीधी बिजाई पर किसानों को प्रेरित करने के लिए तीन हजार प्रति एकड़ अनुदान की घोषणा की और जिले में 1500 एकड़ भूमि पर सीधी बिजाई का लक्ष्य रखा गया। किसान इस ओर आकर्षित भी हुए। 27 जून तक 1175 एकड़ भूमि पर धान की सीधी बिजाई की जा चुकी है।

अभी बिजाई का समय पर्याप्त पड़ा है। ऐसे में कृषि विभाग को उम्मीद है कि वह अपने लक्ष्य को आसानी से प्राप्त कर लेगा।
गांव माजरा के किसान नसीब सिंह ने बताया कि पिछली बार उन्होंने नरमे की बिजाई की थी। इस बार नरमे पर बीमारी के भय के चलते उन्होंने धान की बिजाई की है। इसी तरह गांव अहलीसदर के हरभगवान ने बताया कि पारंपरिक रूप से धान की फसल के लिए पहले पौध तैयार करनी पड़ती है। इस पर पानी और खर्च ज्यादा आता है। अब उसने सीधी बिजाई की है, जिससे बिजली और पानी की बचत होगी।

कैसे हो रही है धान की पारंपरिक खेती
गेहूं के बाद जिले में नरमे या धान की खेती की जाती है। धान की फसल के लिए खेत में पौध तैयार की जाती है। इसमें 24 घंटे पानी खड़ा रहना आवश्यक होता है। मानसून की बरसात न आने पर ये पौध सूख भी जाती है। इस पौध से किसान खेतों में धान की रोपाई करते हैं। इसमें पानी की लागत काफी होती है। प्राकृतिक संसाधन न होने पर किसान बिजली और डीजल पर निर्भर है, जिस पर खर्च भी काफी आता है।

कैसे होती है सीधी बिजाई
आधुनिक तकनीक से अब गेहूं की तरह धान की सीधी बिजाई होने लगी है। इसमें पौध तैयार होने में लगने वाला समय तो बचता ही है, साथ ही पानी का दोहन भी कम होता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सीधी बिजाई से 15 से 20 प्रतिशत पानी की बचत होती है। इसके अलावा 20 से 30 प्रतिशत बिजली की बचत भी होती है। इसमें लेबर की कमोबेश कम जरूरत पड़ती है। इस योजना को प्रोत्साहन देने के लिए राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत किसान को 30 जून तक तीन हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।

पिछले चार साल जमें सामान्य से कम बारिश, अबकी बार फिर जागी उम्मीद
फतेहाबाद जिले में बारिश के लिहाज से पिछले चार साल का मानसून किसानों की उम्मीद पर खरा नहीं उतरा। लेकिन इस बार मौसम विभाग पूरे प्रदेश में अच्छे मानसून की उम्मीद जता रहा है। ऐसे में इसलिए भी धान के प्रति किसानों का विश्वास बढ़ा है।
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पिछले चार साल में बारिश का आंकड़ा
साल        बारिश (एमएम में)
2012        127
2013        256
2014        147
2015        183
स्त्रोत : (कृषि विभाग)


पिछले साल नरमे का फायदा न मिलने से किसानों का रुझान इस बार धान की ओर है। इसके अलावा धान की सीधी बिजाई को किसानों ने अपनाया है। इससे किसानों का 30 प्रतिशत कृषि लागत कम होगी। अगर ये तकनीक कामयाब रही, तो किसान मालामाल होंगे। विभाग भी अगली बार सीधी बिजाई का लक्ष्य बढ़ाने पर विचार कर सकता है।
बलवंत सहारण, कृषि उपनिदेशक, फतेहाबाद ।

 
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