संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहाबाद। शादी के बाद ज्यादातर महिलाएं घर की जिम्मेदारियों के तले अपने आप को ढाल लेती हैं, लेकिन कुछ महिलाएं ऐसी होती हैं जो सब जिम्मेदारियों के साथ अपने लिए अलग राह चुनती हैं।
ऐसी ही हैं जिला बार एसोसिएशन की सचिव रही कमलेश वशिष्ठ। कमलेश ने शादी के दस सालों के बाद वकालत की पढ़ाई की और आज वे अपने पेशे के साथ वंचितों और महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए कार्य कर रही हैं। वे 2017 से फतेहाबाद कोर्ट में अधिवक्ता के तौर पर काम कर रही हैं। जब उन्होंने अधिवक्ता के तौर पर शुरूआत की तब कोर्ट में ऐसे काफी लोग ऐसे आते थे, जो वकीलों की भारी भरकम फीस नहीं भर सकते।
ये सब देखकर कमलेश ने फैसला लिया कि वे ऐसे जरूरतमंद परिवार की कोर्ट केस में मदद करेंगी। जिसके बाद से वे काफी परिवारों के निशुल्क केस लड़कर उन्हें न्याय दिलवा चुकी है।
कमलेश जिला बार एसोसिएशन की पहली महिला सचिव भी रह चुकी हैं। वे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पैनल अधिवक्ता भी हैं। वे प्राधिकरण की ओर से महिला विरुद्ध अपराध को लेकर भी कांउसलिग भी करती हैं। इसके अलावा वे अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति से भी जुड़ी हुई हैं।
केस नंबर एक
13 साल से अलग रह रहे पति-पत्नी का करवाया राजीनामा
कमलेश ने एक मामले में 13 साल से अलग रह रहे पति-पत्नी का राजीनामा करवाया। दोनों की शादी 2005 में हुई थी। 2011 में दोनों का विवाद हो गया और तब से अलग-अलग रह रहे थे। दोनों का 13 साल का एक बेटा भी है। बेटा अपनी मां के पास रह रहा था। लोक अदालत में फैमिली कोर्ट की प्रधान न्यायाधीश नताशा शर्मा की अदालत में दोनों तरफ के वकील देवीलाल, कौशल मेहता व कमलेश वशिष्ठ ने दंपती का मनमुटाव दूर करवा उनका घर बसवाया था। उनके समझाने पर दोनों ने एक बार फिर नई शुरुआत कर घर बसाने का फैसला लिया था।
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केस नंबर दो
प्रेम विवाह हुआ पति नहीं दे रहा तलाक
- एडवोकेट कमलेश ने बताया कि एक मामला ऐसा था कि पति-पत्नी ने प्रेम विवाह किया हुआ था। दो सालों में ही दोनों का मनमुटाव हो गया था। पत्नी का आरोप था कि उसका पति नशे का आदी हो चुका है। जिस कारण वो उसके साथ नहीं रह सकती। वहीं पति भी तलाक नहीं दे रहा था। जिसके बाद उन्होंने 2020 में केस दायर कर दोनों का तलाक करवाया।