फतेहाबाद। सड़क हादसे ने शरीर को तोड़ दिया लेकिन रोहित कुमार का हौसला नहीं डिगा। रीढ़ की हड्डी टूटने के बाद छह महीने तक चल पाने पर भी संदेह था। इसके बावजूद फतेहाबाद के इस पैरा तैराक ने एशियन पैरा गेम्स में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया।
उन्होंने 100 मीटर बैकस्ट्रोक स्पर्धा में एक मिनट 57 सेकंड का समय निकालकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। शुक्रवार को भिवानी में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उन्हें सम्मानित किया। 25 वर्षीय रोहित भारतीय नौसेना में मरीन कमांडो रह चुके हैं।
26 जनवरी 2025 को बाइक दुर्घटना में उनकी रीढ़ की हड्डी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गई थी। ऑपरेशन के दौरान रीढ़ में सात सेंटीमीटर लंबी रॉड डाली गई। इसके बाद पुणे के मिलिट्री अस्पताल खड़की में उनका उपचार, पुनर्वास हुआ।
कोच सूबेदार हरेंद्र सिंह यादव ने उन्हें पैरा खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। रोहित ने 26 सितंबर 2025 से पैरा स्विमिंग का अभ्यास शुरू किया। मरीन कमांडो की नौ महीने की कठिन ट्रेनिंग ने उन्हें मानसिक मजबूती दी। संवाद