फतेहाबाद। डोर-टू-डोर कचरा उठान को लेकर एजेंसी का गड़बड़झाला सामने आया है। तंग गलियों में से कचरा उठान को लेकर नगर परिषद ने टेंडर के एस्टीमेट में पांच ई-रिक्शा शामिल किया था। लेकिन एजेंसी ने पूरे एक साल तक एक भी ई-रिक्शा नहीं लगाई। कचरा उठान को लेकर पूरी सर्विस न देने के बावजूद नगर परिषद भुगतान करता रहा। शुक्रवार को गढ़ी मोहल्ला निवासी नवीन ने ईओ राजेंद्र सोनी को शिकायत दी। ईओ ने शिकायत के बाद सीएसआई ब्रांच से रिपोर्ट मांगी गई है। इसके अलावा निर्देश दिए हैं कि जीपीएस लोकेशन के साथ गाड़ियों की रिपोर्ट दी जाए।
नगर परिषद एजेंसी को हर माह 19 लाख रुपये भुगतान कर रहा है। एजेंसी को 1685 रुपये प्रति टन के हिसाब से ठेका दिया गया है। हालात ये है कि एजेंसी को लापरवाही बरतने पर चार बार जुर्माना लग चुका है और पहले प्रधान खुद पत्र जारी करके कह चुके है काम संतोषजनक नहीं है। लेकिन बावजूद इसके नगर परिषद खुद व्यवस्था नहीं कर पाया और तीन माह के लिए ठेका बढ़ा दिया गया है। ईओ को दी शिकायत में नवीन ने बताया कि पुरानी तहसील चौक की तरफ कई तंग गलियां और यहां पर काफी आबादी है। लेकिन कचरे का उठान नहीं हो रहा है। ठेकेदार को नियम अनुसार ई-रिक्शा लगानी थी लेकिन नहीं लगाई गई है। पहले भी शिकायत दी गई तो टाटा एस गाड़ी भेज दी गई जो कि वहां पर नहीं आ सकती है। तंग गलियों में कचरे का उठान न होने को लेकर बैठकों में भी मुद्दा उठ चुका है।
अब एक करोड़ महंगा हो सकता है कचरा उठाना
नगर परिषद ने नए टेंडर को लेकर प्रस्ताव फरवरी माह में ही तैयार कर लिया था। नए एस्टीमेट के अनुसार कचरा उठान करीब एक करोड़ रुपये महंगा हो जाएगा। पहले करीब 2.20 करोड़ में ठेका दिया गया है लेकिन नया टेंडर 3.13 करोड़ का हो जाएगा। शहर से रोजाना करीब 35 से 40 टन कचरा निकल रहा है। नए प्रस्ताव में 40 से 45 टन लिया गया है। इसके अलावा कचरा उठान के वाहनों और कर्मचारियों में भी बढ़ोतरी की गई है। डोर-टू-डोर कचरा उठान का ठेका लेने वाली एजेंसी को 40 वाहन लगाने होंगे। इसमें 30 टाटा एस गाड़ियां लगानी होंगी। इसके अलावा 4 ट्रैक्टर-ट्रॉली, एक जेसीबी, 5 ई-रिक्शा लगाने होंगे। इसके अलावा 92 कर्मचारी रखने होंगे। जबकि फिलहाल एजेंसी ने 27 वार्डों के लिए 13 टाट एस गाड़ियां लगा रखी हैं। इसके अलावा 2 ट्रैक्टर-ट्रॉली और जेसीबी है, कर्मचारियों की संख्या भी 54 है।
कोट
शिकायत आई है कि तंग गलियों में कचरा उठान के लिए गाड़ियां नहीं जा रही हैं जबकि ई रिक्शा जानी चाहिए। ई-रिक्शा एस्टीमेट में भी शामिल है। अगर ई-रिक्शा नहीं भेजी जा रही है और कचरा उठान नहीं हो रहा है तो कार्रवाई होगी। संबंधित कर्मचारियों से रिपोर्ट मांगी गई है।
-राजेंद्र सोनी, ईओ नगर परिषद
कोट
ई-रिक्शा की जगह बड़ी गाड़ियां लगा रखी है। ई-रिक्शा कामयाब नहीं है। जो तंग गलियां हैं उनके कोने पर गाड़ी खड़ी कर दी जाती है। लोग वहां पर आकर कचरा डाल देते हैं। शनिवार से गाड़ी खड़ी करने के समय को भी बढ़ा दिया जाएगा ताकि किसी को दिक्कत न आएं।
-जतिन कुमार, सुपरवाइजर, डोर-टू-डोर कचरा उठान एजेंसी