फतेहाबाद। मलेरिया के पिछले चार सालों में बेशक नाममात्र मरीज मिले हैं, लेकिन इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग अभी भी अलर्ट है। स्वास्थ्य विभाग ने दो माह में रेपिड फीवर सर्वे करवाया है। सर्वे के दौरान बुखार पीड़ित 2190 मरीज मिले हैं। राहत की बात यह है कि जांच में मलेरिया का कोई रोगी नहीं मिला है। डोर-टू डोर सर्वे में बुखार पीड़ितों की स्लाइडें बनाकर लैब में भेजी जाती है या फिर मलेरिया की जांच की जाती है। जांच के दौरान मलेरिया की पुष्टि नहीं हुई है।
मच्छर के डंक को पनपने से पहले कुचलने के लिए स्वास्थ्य विभाग रेपिड फीवर सर्वे करवा रहा है। इसमें बहुउद्देशीय कर्मचारी, एएनएम और आशा वर्कर को शामिल किया गया है। अब तक अप्रैल और मई माह के पहले 10 दिनों में सर्वे करवाया गया। तीन सदस्यीय टीमें 1 लाख 68 हजार 108 घरों में पहुंची। यहां पर 2190 मरीज बुखार से पीड़ित मिले। संवाद
मलेरिया को लेकर अभी डर जारी
स्वास्थ्य विभाग अभी भी बुखार पीड़ित मरीजों को संदिग्ध मानकर चल रहा है। इसके चलते जांच करवाई जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि अगर कोई मलेरिया पीड़ित है और उसे मच्छर काटता है तो वह आगे फैल सकता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग मलेरिया मरीजों की पहचान करने में जुटा है। वर्ष 2017 में मलेरिया के 42 मरीज मिले थे, लेकिन इसके बाद चार सालों में आठ ही मरीज मिले है। इस साल अभी तक एक भी मरीज नहीं मिला है।
जिले में डेंगू की स्थिति
वर्ष मरीज मिले
2015 189
2016 38
2017 419
2018 56
2019 29
2020 35
2021 993
2022 0
मलेरिया मरीजों की स्थिति
वर्ष मरीज मिले
2015 107
2016 59
2017 42
2018 02
2019 05
2020 00
2021 01
2022 00
मानसून के बाद डेंगू का खतरा, पिछले साल बरपाया था कहर
मानसून के बाद डेंगू का खतरा बढ़ सकता है। जिले में पिछले साल डेंगू के 993 मरीज मिले थे, जो कि अब तक का रिकॉर्ड है। ये भी वजह है कि स्वास्थ्य विभाग ने अभी से डेंगू को लेकर भी एक्टिविटी शुरू कर दी है। हालांकि अभी तक लारवा भी नाममात्र मिल रहा है। मानसून के बाद खतरा ज्यादा बढ़ सकता है।
कोट
स्वास्थ्य विभाग की टीमें माह के पहले 10 दिनों में रेपिड फीवर सर्वे करवा रहा है। 1 लाख 68 हजार घरों में जांच की गई। इस दौरान 2190 मरीज बुखार पीड़ित मिले हैं। स्लाइड बनाकर जांच करवाई गई तो उसमें मलेरिया की पुष्टि नहीं हुई है। लोगों से अपील है कि गर्मी बहुत ज्यादा पड़ रही है। ऐसे में दोपहर 12 से 4 बजे तक घर से बाहर न निकलें।
- डॉ. विष्णु मित्तल, जिला महामारी अधिकारी