मुआवजा बढ़ाने की मांग को लेकर आठ दिन से सेक्टर-12 स्थित उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे किसानों ने जिला प्रशासन व प्रदेश सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया है।
किसानों ने जिला उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर समस्या सुलझाने के लिए 10 अक्तूबर तक समय दिया है।
किसानों ने ज्ञापन में उपायुक्त को स्पष्ट कर दिया है कि निर्धारित समय तक मांग को पूरा नहीं किया गया तो 19 गांवों के किसान 11 अक्तूबर को उनके कार्यालय का घेराव करेंगे।
उसके बाद 13 को मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को काले झंडे दिखाएंगे। इस दिन मुख्यमंत्री का एनआईटी में कार्यक्रम है। किसान संघर्ष समिति ने मंगलवार को धरना स्थल पर फ्रेट कॉरिडोर में जमीन देने वाले सभी गांवों के किसानों के साथ बैठक की। इसमें आंदोलन को तेज करने और कुछ ठोस कदम उठाने के फैसले लिए गए। किसानों ने सांसद अवतार भड़ाना की ओर से पहले आश्वासन देने और बाद में किसानों की मांग को अनसुना करने पर हैरानी प्रकट की।
किसानों ने यह भी कहा कि सोमवार को एसडीएम यशेंद्र सिंह ने किसानों को दो दिन में बातचीत के जरिए मामला हल कराने का आश्वासन दिया था, जिसकी जानकारी के बाद एक साजिश के तहत एसडीएम का तबादला कर दिया गया। इसे लेकर किसानाें में जबरदस्त रोष है।
समिति के कार्यकारी अध्यक्ष राजबीर ने बताया कि केवल धरने से काम चलने वाला नहीं है। अब नई रणनीति बनाई जाएगी। क्योंकि कुछ अधिकारियों की ओर से किसानों के आठ दिनों की पूरी मेहनत को बर्बाद करने का प्रयास किया गया है।
इस मौके पर बुध सिंह नागर, भरत सिंह, संजीव नागर, जोगेंद्र, सतपाल नर्वत, टिपर चंद शर्मा, राजेंद्र, सतेंद्र नागर, बाबूलाल, सुखवीर, राजपाल, तेजपाल, कंवरपाल, घनश्याम दत्त शर्मा, धनवीर, रूपसिंह, प्रेमराज, नहपाल सिंह, रामकिशन, डाल चंद, रघुराज सिंह, नंद किशोर, चंदा, लाजपत, अमर नर्वत, गुलाब सिंह, सुखदेव सैनी, राजेंद्र खटाना, विरेंद्र, रमेश चंद्र, गिर्राज सिंह, लाजपत, अतर सिंह व रमेश चंद सहित कई लोग मौजूद थे।
आंदोलन में महिलाएं व बच्चे भी होंगे शामिल
- समिति प्रवक्ता सतेंद्र नागर ने बताया कि आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए अब इसमें गांव की महिलाओं और बच्चों ने भी शामिल होने की हामी भर दी है।