हरियाणा के जिला जींद में दो सप्ताह से नगूरां सब स्टेशन और पिछले एक सप्ताह से बिजली कर्मचारी यूनियन के यूनिट कार्यालयों पर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी कर रहे बिजली कर्मचारियों ने शहर में जोरदार प्रदर्शन किया।
शुक्रवार को प्रदर्शन में बिजली कर्मचारी अकेले नहीं थे बल्कि अन्य विभागों के कर्मचारी भी उनके साथ शामिल रहे।
कर्मचारियों ने डीसी कार्यालय पहुंचकर पुलिस को कहा कि अगर हिम्मत है तो मामले में आरोपी बनाए गए बिजली कर्मचारियों को गिरफ्तार करके दिखाए।
कर्मचारियों ने जींद प्रशासन से मांग की है कि सेल्फ फाइनेंस स्कीम के घोटाले के आरोप में दर्ज एफआईआर को निरस्त किया जाए।
हरियाणा स्टेट बिजली बोर्ड कर्मचारी यूनियन जींद यूनिट प्रधान राजेश कुमार ने प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए कहा कि पुलिस महकमा बिजली कर्मचारियों को परेशान कर रहा है, जबकि घोटाले से बिजली कर्मचारियों का कोई लेना देना नहीं है।
बावजूद इसके पुलिस ने 30 कर्मचारियों, जिनमें जेई प्रदीप भी शामिल हैं, को डीएसपी की तरफ से सम्मन भेजे गए हैं। इतना ही नहीं, अब पुलिस इन सभी को गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही है।
आए दिन महकमे के अधिकारी कर्मचारियों को यह कहकर प्रताड़ित कर रहे हैं कि सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा।
डीसी को ज्ञापन सौंपने से पूर्व कर्मचारियों ने रानी तालाब स्थित नेहरू पार्क में बैठक की। इसके बाद कर्मचारी गोहाना रोड होते हुए डीसी दफ्तर पहुंचे।
यहां पर कर्मचारियों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी।
ठेकेदारों और अधिकारियों ने किया था घोटाला
बिजली वितरण निगम के नगूरां सब डिवीजन में तीन साल पहले सेल्फ फाइनेंस स्कीम में घोटाले को तीन-चार अधिकारियों और कुछ ठेकेदारों ने अंजाम दिया था।
इसका खुलासा उस समय हुआ जब घोटाले करने वाले अधिकारियों को नगूरां सब डिवीजन से तबादला हुआ। तबादला होने के बाद नए एसडीओ ने मामले की परतें उधेड़नी शुरू की तो घोटाला सामने आया।
इसके बाद भाकियू की जींद इकाई ने अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया। सरकार ने मामले की जांच सोनीपत विजिलेंस को सौंप दी।
इसमें अधिकारियों समेत कई और कर्मचारी भी फंस गए। इसके विरोध में पिछले 15 दिनों से बिजली निगम के कर्मचारी आंदोलन कर रहे हैं।
निगम ने पांच साल पहले ट्यूबवेल कनेक्शन देने के लिए सेल्फ फाइनेंस स्कीम शुरू की थी। इसमें निगम के अधिकारियों ने ठेकेदारों से मिलकर किसानों से पैसा ले लिया और कनेक्शन भी जारी कर दिए, लेकिन इनका रिकार्ड अधिकारियों ने तैयार नहीं करवाया।
रिकार्ड तैयार करने की जिम्मेवारी निगम के ठेकेदार की थी। फर्जीवाड़ा तब खुला जब नगूरां सब डिवीजन से एसडीओ के तबादले होने लगे।
नए अधिकारी के सामने करीब 50 मामले आए। अधिकारी ने नगूरां सब डिवीजन में दो तीन किसानों के खिलाफ बिजली चोरी का मामला दर्ज करवाया तो भाकियू विरोध में उतर पड़ी और अधिकारियों व कर्मचारियाें के खिलाफ मामला दर्ज करवा दिया।
उधर, निगम के कर्मचारी दलील दे रहे हैं कि उन्होंने अधिकारियों के आदेशों की पालना की थी। घोटाले में उनका कोई हाथ नहीं है।
भाकियू जींद के जिलाध्यक्ष महेंद्र सिंह घिमाणा कहते हैं कि निगम के फील्ड स्टाफ को यह मालूम था कि सब डिवीजन लेवल के अधिकारियों व ठेकेदारों में मिलीभगत हो चुकी है, लेकिन उन्होंने उच्च अधिकारियों को नहीं बताया।
एसई बसंल भी हुए थे चार्जशीट
बिजली कनेक्शन घोटाले में जींद के एसई भी चार्जशीट हो गए थे। सरकार ने यह कार्रवाई घोटाला पकड़ने वाले एसडीओ की रिपोर्ट के आधार पर की थी।
एसडीओ के मामले को पकड़ते ही एसई ने उन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया कि वह ट्यूबवेल कनेक्शनों को नियमित कर दें। ऐसा करने से एसडीओ ने नियमों का हवाला देकर मना कर दिया।
कनेक्शन नियमित करने के अब भरवाए पैसे
नगूरां सब डिविजन में जितने भी किसानों ने सेल्फ फाइनेंस स्कीम के तहत ट्यूबवेल कनेक्शन करवाए थे। उनको निगम अब नियमित कर रहा है।
कनेक्शन नियमित करने के लिए निगम ने किसानों से सुरक्षा राशि समेत बिजली के बकाया बिल का पैसा अब भरवाया है। इसके बाद ये कनेक्शन अवैध नहीं रहेंगे।