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बिजली चोरी ने तोड़ी बिल भरने वालों की कमर

Mon, 30 Dec 2013 01:28 AM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़/ डॉ. सुरेंद्र धीमान
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हरियाणा में ग्रामीण क्षेत्रों की घरेलू बिजली सप्लाई और कृषि क्षेत्र के नलकूपों की सप्लाई लाइनें अलग-अलग करने पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, मगर बिजली चोरी थमने का नाम नहीं ले रही है।
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प्रदेश में इस समय बिजली चोरी यानी लाइन लॉस 31 फीसदी है। वहीं, बिजली बिलों के 4500 करोड़ रुपये उपभोक्ताओं पर बकाया है।

इसका खामियाजा महंगी बिजली के रूप में नियमित रूप से बिल भरने वाले ईमानदार उपभोक्ताओं को उठाना पड़ रहा है। यह दावा विपक्षी नहीं, बल्कि कांग्रेस के नेता ही कर रहे हैं।

कांग्रेस विधायक प्रो. संपत सिंह के बेटे गौरव सिंह ने हरियाणा बिजली नियामक आयोग के पास एक पुनर्विचार याचिका दायर की है।

इसमें उन्होंने दावा किया है कि बीते दस साल के दौरान बिजली ढांचे में सुधार के लिए 23 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश हुआ है मगर बिजली महंगी होती चली गई।
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हर साल उपभोक्ताओं पर फ्यूल सरचार्ज एरियर (एफएसए) के नाम पर हजारों करोड़ रुपये का बोझ डाला जा रहा है।

बिजली निगम चोरी रोकने में नाकाम हो रहे हैं। याचिका पर आयोग ने सार्वजनिक सुनवाई करने का फैसला किया है।
 
कम करो बिजली दरें, एफएसए वापस लो
गौरव ने पुनर्विचार याचिका में आयोग से मांग की है कि 30 मार्च, 2013 को बिजली दरें बढ़ाने और दरों की तीन स्लैब बनाने का आदेश जारी किया था।

इससे 101 यूनिट फूंकने वाले बिजली उपभोक्ता का दो महीने का बिल 316.68 रुपये बढ़ गया। पहले 40 यूनिट तक कम रेट लगता था और 40 से 100 यूनिट का अलग लगता था।

मगर अब 101 यूनिट होते ही सभी यूनिटों का एक रेट लगता है। याचिका में कहा गया है कि बिजली निगम फ्यूल सरचार्ज एरियर के नाम पर 34 पैस प्रति यूनिट वसूल रहे हैं।

स्लैब प्रणाली के तहत ज्यादा यूनिट फूंकने वालों से ज्यादा एफएसए वसूला जा रहा है। इसकी अनुमति आयोग से नहीं ली है। इसलिए बढ़ाई गई बिजली दरें वापस ली जाएं और एफएसए वसूलना बंद किया जाए।
 
1105 फीडरों पर आधे से ज्यादा चोरी
गौरव सिंह ने दावा किया है कि उत्तर और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगमों के 1105 बिजली फीडरों पर आधे से ज्यादा बिजली चोरी हो रही है।

इसे लाइन लॉस का नाम दिया जा रहा है। इनमें से 271 फीडरों पर 75 से 90 फीसदी लाइन लॉस है, जबकि 834 फीडरों पर यह लॉस 50 से 75 फीसदी है।

उनका दावा है कि प्रदेश में इस समय लाइन लॉस 31 फीसदी है। अगर लॉस को कम कर 20 फीसदी पर लाया जाए तो 2200 करोड़ रुपये का राजस्व जुटेगा।

हर साल बिलों की 80 फीसदी वसूली होती है। यह कम से कम 95 फीसदी होनी चाहिए। अगर 15 फीसदी वसूली बढ़ा ली जाए तो 1500 करोड़ रुपये का राजस्व जुटेगा।

बिजली बिलों का उपभोक्ताओं की तरफ 4500 करोड़ रुपये बकाया है। अगर यह वसूली कर ली जाए और लाइन लॉस कम कर लिया जाए तो दोनों निगमों को 8300 करोड़ रुपये का राजस्व मिलेगा।

इससे दरें भी कम करने में मदद मिलेगी।



बिजली बिलों ने लोगों की कमर तोड़ दी है। इसलिए मैंने आयोग के पास पुनर्विचार याचिका दायर की है।
- गौरव सिंह, विधायक प्रो. संपत सिंह के बेटे

आयोग के फैसले के बाद 101 यूनिट फूंकने वाले उपभोक्ता का बिल 36 फीसदी बढ़ गया है। मैंने यह बात मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को बताई है, वे भी चिंतित हैं।
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- प्रो. संपत सिंह, नलवा से कांग्रेस विधायक और पूर्व बिजली एवं वित्त मंत्री
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