सिरसा में डबवाली के सिंगला मैटरनिटी व नर्सिंग होम के संचालक डॉ. पवन सिंगला को पुलिस ने गिरफ्तार करके मंगलवार को अदालत में पेश किया। ड्यूटी मजिस्ट्रेट न्यायिक दंडाधिकारी देवेंद्र सिंह की अदालत ने उसे एक दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
सिविल सर्जन डॉ. सुरेंद्र नैन ने बताया कि डॉ. पवन सिंगला के खिलाफ थाना शहर में पीएनडीटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। सोमवार को स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीम ने सिंगला मैटरनिटी व नर्सिंग होम में छापा मारा था जांच के दौरान कई प्रकार की खामियां सामने आईं।
जिनके आधार पर डॉ. पवन सिंगला के खिलाफ केस दर्ज करवाया गया। उन्होंने बताया हालांकि उपरोक्त नर्सिंग होम में स्थापित पंजीकृत अल्ट्रासाउंड केंद्र ट्रैकिं ग सिस्टम से जुड़ा हुआ है जिसका कंट्रोल रूम सरकारी अस्पताल में बनाया गया है।
कंट्रोल रूम में भी ट्रैकर सिस्टम से सिंगला मैटरनिटी व नर्सिंग होम के अल्ट्रासाउंड मशीन का रिकॉर्ड चेक किया जा रहा है। इससे पूर्व चिकित्सक के अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष जमानत अर्जी प्रस्तुत की। जिस पर अदालत ने जमानत के लिए पुलिस को नोटिस जारी करके जवाब मांगा।
सिरसा में बेटी बचाने की सरकार की मुहिम कारगर साबित नहीं हो रही है। अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर लगाए गए ट्रैकिंग सिस्टम का कोई खास परिणाम सामने नहीं आया।
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि कानून बनने के बावजूद लोगों की मानसिकता बदले बिना बेटी नहीं बचाई जा सकती। दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग ने अब जिले के सभी 49 अल्ट्रासाउंड केंद्रों के रिकॉर्ड की जांच के लिए मुहिम शुरू कर दी है।
प्रशासन काफी समय से सिरसा में बेटियों को बचाने के लिए प्रयासरत है। इसके बावजूद जिले में लड़कों की अपेक्षा लड़कियों की संख्या कम है सिरसा में लिंगानुपात 1000 : 883 है।
जिले में 49 अल्ट्रासाउंड केंद्र हैं। इन पर निगरानी के लिए प्रशासन ने ट्रैकिंग सिस्टम लगाया हुआ है। इस सिस्टम के जरिए संबंधित अल्ट्रासाउंड केंद्र की गतिविधियों की जिला मुख्यालय पर निगरानी होती है। गर्भपात रोकने के लिए सरकार ने नकद उपहार वाली योजना भी शुरू की हुई है। गर्भपात संबंधी सूचना देने वाले व्यक्ति को 20 हजार रुपये की राशि उपहार स्वरूप दी जाती है बावजूद लिंग जांच और गर्भपात का धंधा चलता है।
जांच के दायरे में अल्ट्रासाउंड केंद्र
डबवाली में एक अल्ट्रासाउंड केंद्र के रिकॉर्ड में मिली कमियों के बाद सभी अल्ट्रासाउंड केंद्र जांच के दायरे में आ गए हैं। डबवाली के एक नर्सिंग होम के अल्ट्रासाउंड केंद्र में स्वास्थ्य विभाग को 76 ऐसे मामले मिले हैं, जिनमें केंद्र संचालक ने कोताही बरती है।
यहां तक की रजिस्टर में कटिंग और ओवर राइटिंग की गई है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक रेफरल स्लिप पर लिखी भाषा समझ नहीं आती। यह भी पता नहीं चल पा रहा कि संबंधित मरीज को किसने रेफर किया है। यहां तक की रिपोर्टों पर चिकित्सक के हस्ताक्षर तक नहीं है। रिकॉर्ड देखने से पता नहीं चलता कि आखिर संबंधित मरीज का अल्ट्रासाउंड क्यों और किन परिस्थितियों में किया गया।
हर माह होते हैं पांच हजार अल्ट्रासाउंड
डिप्टी सीएमओ (परिवार कल्याण) डॉ. राजकुमार ने बताया कि सभी 76 फार्मों का पुनर्निरीक्षण किया जाएगा। ऐसे सभी मामलों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिनमें अल्ट्रासाउंड करवाने वाली महिला को गर्भवती हुए तीन माह से ऊपर का समय हो गया है।
गर्भपात की आशंका के चलते ऐसे मामलों की जांच की जाएगी। जिले में हर माह करीब पांच हजार अल्ट्रासाउंड होते हैं। हर तीन माह बाद इनकी रिपोर्ट हासिल की जाती है।