सिंचाई विभाग ने 32 साल पहले दो गांवों से माइनर निकाली और अब उसका मुआवजा दिया जा रहा है। वह भी केवल 12 लाख प्रति एकड़।
इतने
सालों बाद बहुत कम मुआवजा राशि जारी होने से नाराज किसानों ने न्यायालय का
दरवाजा खटखटाने की चेतावनी दी है। किसानों ने लगभग 41 एकड़ जमीन का एनसीआर
की तर्ज पर एक करोड़ रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने की मांग की है। वहीं,
विभाग द्वारा कहा जा रहा है कि संबंधित केस अदालत में विचाराधीन था। इस वजह
से इतना समय लगा।
सिंचाई विभाग ने 1981 में नारनौल क्षेत्र
की माधोगढ़ ब्रांच से सतनाली कस्बे और साथ लगते गोपालवास गांव की सीमा तक
बास माइनर का निर्माण किया था। इसमें दोनों गांवों की सात किलोमीटर लंबे
एरिया में पड़ने वाली लगभग 41 एकड़ जमीन प्रयोग हुई। इसमें सतनाली की 3
एकड़ और गोपालवास की लगभग 38 एकड़ जमीन ली गई।
एनसीआर की तर्ज पर मांग रहे दाम
सिंचाई
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार माइनर निर्माण के 32 वर्ष बाद 8.20 करोड़
रुपये की राशि बतौर मुआवजा जारी की गई है। इसका वितरण भी शुरू किया, लेकिन
यह राशि प्रति एकड़ 12 लाख रुपये के हिसाब से जारी की गई जिससे किसान
नाराज हो गए। गोपालवास के सरपंच नरेश पुनिया ने बताया कि उन्होंने पहले भी
कई बार अपील की थी, लेकिन उनकी मांग नहीं सुनी गई। अब 32 साल बाद 12 लाख
रुपये प्रति एकड़ दिए जा रहे हैं। यहां पर 33 लाख रुपये प्रति एकड़ तो
मुआवजा पहले भी मिल चुका है। अब एनसीआर में आने के बाद एक करोड़ रुपये
प्रति एकड़ का रेट हो जाएगा।
मुआवजा राशि जारी करने में भी भेदभाव
चरखीदादरी
नहर सेवा परिमंडल द्वारा जारी किए गए आठ करोड़ में गोपालवास को 5 करोड़ और
सतनाली को 3 करोड़ 20 लाख की राशि बांटी गई है। महेंद्रगढ़ जिले के किसान
को 16 लाख और भिवानी जिले के किसान को 12 लाख प्रति एकड़ राशि जारी की गई
है। इसमें 30 प्रतिशत ब्याज के अलावा 12 प्रतिशत अतिरिक्त राशि भी जारी की
गई है। इस पर भिवानी जिले के किसानों ने भेदभाव का आरोप लगाया है।
खेतों को पानी तक नहीं मिला
गोपालवास
के सरपंच नरेश पुनिया सहित कई किसानों ने कहा कि 1981 में जमीन अधिगृहीत
की गई थी। अब दिसंबर 2013 में मुआवजा दिया जा रहा है। वह भी मात्र 12 लाख
रुपये प्रति एकड़। उन्होंने चेतावनी दी कि जारी मुआवजा राशि लेने के बाद 50
किसान अदालत की शरण लेंगे। नारनौल के वरिष्ठ अधिवक्ता मुकेश बलौदा ने कहा
कि 32 वर्ष बाद मुआवजा आवंटन सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली में लापरवाही को
दर्शाता है। किसान दरिया सिंह, जयचंद, जागेराम, छाजुराम और रामकिशन आदि ने
बताया कि मुआवजा तो दूर उनके खेतों के लिए पानी तक नहीं छोड़ा गया। नारनौल
के जिला राजस्व अधिकारी सतीश यादव ने बताया कि सिंचाई विभाग किसानों को
मुआवजा वितरण कर रहा है। प्रति एकड़ मुआवजा राशि कम ज्यादा करना नहर विभाग
का काम है।
यह मामला अदालत में विचाराधीन था। इस वजह से मुआवजा 32 साल बाद मिल रहा है।
- बीएस नारा, एक्सईएन, सिंचाई विभाग