गांव जगरामबास की आबादी करीब 2,500 है। इन लोगों के लिए गांव की फिरनी तक कच्ची है। स्कूल और श्मशान घाट को जाने वाले रास्ते का निर्माण न होने से ग्रामीणों को परेशानी हो रही है। जल निकासी का प्रबंध न होने के कारण स्कूल के सामने दूषित पानी भरा रहता है। इससे राहगीरों समेत स्थानीय लोग भी परेशान रहते हैं।
विकास धनखड़, सुरेंद्र, वीरेंद्र, संदीप, भूपेंद्र और प्रदीप आदि बताया कि गांव में सार्वजनिक भवन तक नहीं बन सका है। चिकित्सा सुविधा के अभाव में ग्रामीणों को निजी चिकित्सकों से अपना और पशुओं का महंगा इलाज करवाना पड़ता है या फिर पांच किमी दूर बाढड़ा पशु अस्पताल जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने शासन, प्रशासन से कई बार संसाधन बढ़ाने की मांग की है। इसके बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हो सकी। संवाद
ग्रामीण बोले : लंबे समय से झेल रहे समस्याओं की कमी
गांव में दूषित पानी की निकासी के लिए उचित प्रबंध नहीं हो सका है। इससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस बारे में प्रशासन को भी कई बार अवगत कराने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका है जिससे लोगों में गुस्सा है।
- विकास धनखड़।
स्कूल की ओर जाने वाले रास्ते का निर्माण नहीं हो पाया है और इस कारण स्कूल के सामने दूषित पानी भरा रहता है। दूषित पानी में गिरने, फिसलने से उनके कपड़े गंदे हो जाते हैं। कई लोग चोटिल भी हो चुके हैं। प्रशासन को अवगत कराने के बावजूद समस्या नहीं सुलझी। -
संदीप।
गांव में मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। इससे लोगों को दूसरे गांव में जाना पड़ता है। पशुओं के इलाज के लिए निजी चिकित्सक का सहारा लेना पड़ता है जो काफी महंगा पड़ता है। सरकार को पशु चिकित्सक तैनात करना चाहिए ताकि गांव में ही पशुओं का इलाज हो सके।
- सुरेंद्र सिंह।
गांव में सार्वजनिक भवन नहीं है। इस आयोजन के दौरान ग्रामीणों के साथ अधिकारियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस बारे में ग्रामीण विभाग और प्रशासन को कई बार परेशानी बता चुके हैं। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।
- वीरेंद्र सिंह।
ग्रामीणों की समस्याओं को विभागीय अधिकारियों तक पहुंचाया जा रहा है। समस्याओं को सुलझाने के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों से जल्द मुलाकात की जाएगी। गांव में मूलभूत सुविधाओं की कमी दूर करवाई जाएगी।
- राधा देवी, सरपंच, जगरामबास।