वन हमारी अमूल्य संपदा है। वनों का होना जीवन का संकेत है। जल और वृक्षों की रक्षा करना मानवीय अस्तित्व को कायम रखने का ही एक मजबूत पहलू है। जिला के उप वन संरक्षक बलबीर सिंह खोखा ने दादरी की वन संपदा के बारे में जानकारी देते हुए ये शब्द कहे। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में दादरी का वन क्षेत्र 7547 एकड़ भूमि में फैला हुआ है।
उन्होंने कहा कि नागरिकों को पेड़ों की रक्षा करने में वन विभाग का सहयोग करना चाहिए। आरक्षित वन क्षेत्र 35 हेक्टेयर भूमि में है। जिला में रेल मार्ग के दोनों ओर 117 हेक्टेयर, सड़क मार्ग के आसपास 780 हेक्टेयर, नहरों के दोनों ओर 1808.42 हेक्टेयर, चकबांध के समीप 9.78 हेक्टेयर भूमि, भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 38 के अंतर्गत विकसित किया गया वन क्षेत्र 81.129 हेक्टेयर, जोहड़, चारागाह, बणी आदि में वन भूमि 112.047 हेक्टेयर, पंजाब संरक्षित भूमि अधिनियम की धारा 4 व 5 के के तहत सुरक्षित वन क्षेत्र 75.505 हेक्टेयर है।
बलबीर सिंह खोखा ने बताया कि दादरी जिला में 16969 कीकर, 1887 शीशम, 16476 सफेदा के पेड़ हैं। उन्होंने बताया कि नीम, पीपल, बड़, जामुन आदि अन्य प्रजातियों के 211320 पेड़ हैं। इन सभी वृक्षों को घेराव 111312.84 क्यूबेक मीटर का है। उप वन संरक्षक ने बताया कि भारतीय वन अधिनियम की धारा 38 में वह वन क्षेत्र आता है, जिसे भूस्वामी स्वयं वन विभाग को 15 साल के लिए सौंपता है। रेतीले इलाके में भूमि कटाव को रोकने के लिए वृक्ष लगाए जाते हैं, जो कि 15 वर्ष तक विभाग के अधीन संरक्षित रहते हैं। बाद में इनका रखरखाव भूस्वामी स्वयं करता है। इसी प्रकार पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम में वे सभी वृक्ष शामिल हैं, जो आम रास्तों, घर, मंदिर, स्कूल, धर्मशाला के आसपास मौजूद हैं। इन पेड़ों को वन विभाग की अनुमति के बगैर काटा नहीं जा सकता।