चरखी दादरी। शहर के कई निजी स्कूलों में ट्रांसपोर्ट सुविधा के नाम पर नियमों को ताक पर रखा जा रहा है। विद्यार्थियों को पहले स्कूल और फिर वापस घर छोड़ने के लिए कई साल पुराने ऑटो और अन्य छोटे वाहन प्रयोग किए जा रहे हैं। इतना ही नहीं इन वाहनों में निर्धारित संख्या से अधिक विद्यार्थी बैठाए जा रहे हैं जो ऑटो में चालक की सीट के बगल में भी बैठे नजर आते हैं। इनमें सफर करने वाले विद्यार्थी अपने शरीर के अंगों को भी बाहर निकालते हैं। सरेआम नियम ताक पर रखे जा रहे हैं, लेकिन कोई अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा।
संवाददाता ने बुधवार स्कूली विद्यार्थियों को घर से स्कूल और फिर स्कूल से घर छोड़ने वाले वाहनों की पड़ताल की तो सामने आया कि कई स्कूलों में ट्रांसपोर्ट सेवा के लिए वाहन नहीं हैं। मजबूरी वश अभिभावकों को बच्चों के लिए ऑटो लगवाने पड़ रहे हैं। कुछ ऑटो और अन्य वाहन तो ऐसे हैं जिनके फिटनेस सर्टिफिकेट को लेकर भी कुछ कहा नहीं जा सकता। संवाददाता बुधवार दोपहर एक निजी स्कूल के सामने पहुंचा तो वहां करीब सात प्राइवेट वाहन मिले। इनमें ज्यादातर ऑटो थे जो बच्चों को घर छोड़ने के लिए वहां पहुंचे थे। दो ऑटो में 12 और 10 विद्यार्थी सवार मिले। यहां तक कि एक ऑटो में चालक के बगल वाली सीट पर बैठी छात्रा शरीर का अंग बाहर निकाले नजर आई जबकि एक अन्य वाहन में पीछे बैठे तो विद्यार्थी भी मुंह बाहर निकालते दिखे।
वहीं, दूसरी ओर आरटीए विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्कूली वाहनों की जांच के लिए नियमित अंतराल पर चेकिंग अभियान चलाया जाता है। उस दौरान दस्तावेजों समेत फिटनेस प्रमाण पत्र की जांच भी की जाती है। हालांकि एक अधिकारी ने बताया कि ऑटो में निर्धारित क्षमता से अधिक विद्यार्थी बैठाना नियमों के खिलाफ है। इतना ही नहीं, विद्यार्थियों के घर से स्कूल और फिर वापस घर छोड़ने वाले वाहन के लिए दस्तावेजों समेत अन्य शर्तें पूरी करना अनिवार्य है।
- 650 स्कूली वाहन हैं पंजीकृत
जिले में निजी स्कूलों की अगर बात करें तो संख्या करीब 290 है। इन स्कूलों में करीब 30 हजार विद्यार्थी पढ़ते हैं। शहर में निजी स्कूलों की संख्या 30 से अधिक है। वहीं, स्कूली वाहनों की अगर बात करें तो 650 वाहन परिवहन विभाग से पंजीकृत हैं।
- तीन साल में महज 30 स्कूली वाहनों के हुए चालान
आरटीए विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले तीन साल में स्कूली वाहनों पर कार्रवाई न के बराबर हुई है। पिछले 3 सालों में दस्तावेज अधूरे होने और फिटनेस प्रमाण पत्र न मिलने पर 30 वाहनों के चालान किए गए हैं। वहीं, 2022 में अब तक एक भी स्कूली वाहन का चालान नहीं किया गया है।
- क्या हैं स्कूली वाहनों के लिए नियम -
1- स्कूल बसों में अच्छी क्वालिटी के सीसीटीवी अनिवार्य हैं।
2- सीटिंग क्षमता के अनुसार ही विद्यार्थी बैठाए जा सकते हैं।
3- स्कूली वाहन कंडम हाल में नहीं होना चाहिए।
4- स्कूली वाहन को सड़क पर उतारने के लिए दस्तावेज पूरे हों।
5- बस में महिला व पुरुष सहायक होना अनिवार्य है।
6- बस पर चालक का नाम और मोबाइल नंबर लिखा होना अनिवार्य है।
7- स्कूली वाहन के पीछे पुलिस, एंबुलेंस व प्रबंधक समिति का नंबर लिखा होना जरूरी है।
8- स्कूली वाहन में फर्स्ट एड किट व अग्निशमन यंत्र होना जरूरी है।
वर्जन:
करीब 650 स्कूली वाहन विभाग से पंजीकृत हैं। हम समय-समय पर चेकिंग अभियान चलाकर फिटनेस सर्टिफिकेट और अन्य दस्तावेजों की जांच करते हैं। नियमों को ताक पर रखकर विद्यार्थियों को सफर करवाना गलत है और ऐसा करने पर कार्रवाई का प्रावधान है। ऐसे केस मिलने पर हमारी टीम सीधे चालान करेगी।
- किशोर कुमार, टीआई एवं आरटीए अतिरिक्त सचिव।
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