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सचिन और अमित ने इसरो तक पहुंच पेश की मिशाल

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चरखी दादरी। कहते हैं कि मन में अगर कुछ करने का जज्बा हो तो कोई बाधा आड़े नहीं आती। लगातार प्रयास और मेहनत करने पर यकीनन मंजिल खुद चलकर पास आती है। इस बात को जिले के दो युवाओं ने इसरो में बतौर वैज्ञानिक अपना चयन करवाकर साबित भी किया है। एक युवा सचिन जाखड़ बिगोवा से हैं तो दूसरे होनहार युवा अमित शर्मा डुडीवाला किशनपुरा से हैं। ग्रामीण परिवेश से जुड़ाव होने के बावजूद इन दोनों ने अपनी लग्न और मेहनत से ऐसा मुकाम पाया है जो अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत हैं। युवा दिवस पर पेश है विशेष रिपार्ट...
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- पिता हैं किसान, अमित शर्मा ने बढ़ाया गांव और जिले का मान
कड़ी मेहनत के बलबूते डुडीवाला किशनपुरा निवासी किसान सज्जन सिंह का बेटा अमित शर्मा का गत मई माह में इसरो में बतौर वैज्ञानिक चयन है। अमित ने सात जून को विक्रम साराभाई सेंटर में ज्वाइनिंग की थी। अमित शर्मा ने बताया कि उन्हें बचपन से ही विज्ञान विषय काफी पसंद था। उनके मन में हमेशा कुछ जानने की जिज्ञासा बनी रहती थी। इसके चलते गांव के स्कूल से दसवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने ग्यारहवीं कक्षा में विज्ञान विषय चुना। बारहवीं कक्षा में अच्छे नंबर लाने के बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई एनआईटी कुरुक्षेत्र से पूरी की। वर्ष 2017 में मेकेनिकल ब्रांच से बीटेक की और इसके बाद भी उन्होंने आगे की पढ़ाई जारी रखी। साथ ही वैज्ञानिक पद की भर्ती परीक्षा में भाग लेते रहे। वर्ष 2019 में आयोजित इसरो की लिखित परीक्षा में उन्होंने भाग लेकर सफलता हासिल की।
- पढ़ाई के साथ सचिन ने पूरा किया वैज्ञानिक बनने का सपना
गांव बिगोवा निवासी सचिन का गत अप्रैल माह में इसरो में वैज्ञानिक के पद पर चयन हुआ। सचिन के पिता कुलदीप सिंह जाखड़ ने बताया कि सचिन ने ग्रामीण क्षेत्र में रहते हुए राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मातनहेल से बारहवीं तक की शिक्षा ग्रहण की। बारहवीं के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से बीएससी की शिक्षा ग्रहण की और आईआईटी दिल्ली में एमएससी (गणित) करने के बाद पीएचडी की। इसके साथ ही वो इसरो के लिए भी तैयारी करता रहा। सचिन के प्रयास रंग लाए और गत अप्रैल माह में उनका चयन भी हो गया। सचिन के पिता राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बिगोवा में वाणिज्य विषय के प्रवक्ता पद पर कार्यरत हैं और माता गृहिणी है। सचिन ने सात से आठ घंटे नियमित पढ़ाई कर यह मुकाम हासिल किया। उनका कहना है कि लक्ष्य निर्धारित कर पूरी मेहनत की जाए तो मंजिल अवश्य मिलती है।
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