चरखी दादरी। नियम 134ए में स्कूल अलॉट होने के बाद अब बच्चों के कॅरियर पर तलवार लटक गई है। दरअसल स्कूल अलॉट होने के बाद अभिभावकों ने स्कूलों से बच्चों की एसएलसी ले ली। मगर जो स्कूल अलॉट हुआ, उसके संचालक प्रवेश से इनकार कर रहे हैं। अभिभावक शिक्षा विभाग अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। स्कूल संचालकों का कहना है कि सरकार ने उनका पिछले दो साल का प्रति विद्यार्थी भुगतान रोक रखा है। वे गरीब बच्चों को पढ़ाने से इनकार नहीं कर रहे हैं। अब दाखिले की अंतिम तिथि 24 दिसंबर है। वहीं शिक्षा विभाग इन निजी स्कूल प्रबंधकों को पत्र भेजकर दाखिला सुनिश्चित करने के निर्देश जारी कर चुका है।
जिले में 155 निजी स्कूलों में 3631 सीटों पर नियम 134ए के तहत दाखिले होने हैं। इसके लिए 1625 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था, जबकि 1054 विद्यार्थियों ने यह प्रवेश परीक्षा दी थी। शिक्षा विभाग ने हाल ही में नियम-134 ए के तहत पहली मेरिट लिस्ट जारी कर पात्र विद्यार्थियों को स्कूल अलॉट किए थे। पात्र उम्मीदवारों को इन स्कूल में 24 दिसंबर तक दाखिला सुनिश्चित करना है।
कहां जाएं, कैसे होगी बच्चों की पढ़ाई
अब अधिकतर अभिभावकों की शिकायतें है कि निजी स्कूल संचालक उनके बच्चों का दाखिला नहीं कर रहे हैं। अभिभावक सज्जन कुमार ने बताया कि उसकी बेटी को स्कूल अलॉट हो चुका है, लेकिन प्रबंधक दाखिला देने से इनकार कर रहा है। सज्जन सिंह ने बताया कि इसी प्रकार विद्यार्थी नितिन व रोहित को भी अलॉट किए गए स्कूल में दाखिला नहीं दिया जा रहा हैै। सज्जन कुमार ने शिक्षा विभाग अधिकारियों से पात्र विद्यार्थियों का दाखिला करवाए जाने की मांग की है। शिक्षा विभाग की ओर से सभी स्कूलों को इस नियम के तहत इन विद्यार्थियों के दाखिले करने के निर्देश पत्र द्वारा जारी किए जा चुके हैं। पत्र क्रमांक-ए-1-477/21 दिनांक 21/12/2021 के तहत यह निर्देश सभी निजी स्कूलों को जारी कर रखे हैं।
प्रति विद्यार्थी भुगतान का ये है प्रावधान
स्कूल संचालकों का कहना है कि 2019-20 व 2020-21 वर्ष का प्रति विद्यार्थी फीस चार्ज सरकार की तरफ बकाया है। शिक्षा नियम 134 ए के तहत सरकार निजी स्कूलों को फीस के रूप में प्रति विद्यार्थी भुगतान करती है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्र में प्राइमरी तक प्रति विद्यार्थी 300 रुपये, कक्षा आठवीं तक प्रति विद्यार्थी 500 रुपये भुगतान करती है। इसी प्रकार शहरी क्षेत्र में प्राइमरी तक 500 रुपये और आठवीं कक्षा तक 700 रुपये फीस भुगतान का प्रावधान है। स्कूल प्रबंधकों का कहना है कि कक्षा नौंवी से बारहवीं तक की कक्षाओं का तो आज तक एक भी पैसा सरकार की तरफ से फीस के रूप में नहीं मिला है।
22 दिसंबर को सुबह 10 बजे इस संबंध में डायरेक्टर शिक्षा विभाग के साथ बातचीत होनी है। सभी स्कूल संचालकों को शिक्षा विभाग के नियमानुसार इन विद्यार्थियों के दाखिला करने को लिखित में भेज रखा है। स्कूलों की बकाया फीस को लेकर भी उच्चाधिकारियों से चर्चा की जाएगी। - जयप्रकाश सभ्रवाल, डीईओ
सभी प्राइवेट स्कूल संचालक गरीब वर्ग के बच्चों को पढ़ाने के लिए तैयार है। स्कूल संचालक दाखिला से मना नहीं कर रहे हैं। सरकार की तरफ से शिक्षा नियम 134 ए के तहत स्कूल संचालकों को दो साल से फीस राशि का भुगतान नहीं किया है। इतना ही नहीं कक्षा नौवीं से बारहवीं कक्षा का तो आज तक एक पैसा भी सरकार की ओर से नहीं दिया है। स्कूल प्रबंधक इन बच्चों के भविष्य को लेकर पूरी तरह से चिंतित हैं।
- सुरेश सांगवान, प्रधान प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन।
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शिक्षा विभाग कार्यालय की फोटो।