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तीन कृषि कानूनों की वापसी करोड़ों किसानों और मजदूरों की जीत : राजू मान

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कितलाना टोल प्लाजा से हांसी महापंचायत के लिए रवाना होता किसानों का जत्था। संवाद - फोटो : CharkhiDadri
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चरखी दादरी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीन कृषि कानून रद्द करने की घोषणा करना देश के करोड़ों किसान और मजदूरों की ऐतिहासिक जीत है। यह बात किसान नेता राजू मान ने कितलाना टोल पर किसानों के अनिश्चितकालीन धरने को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि साल भर से चल रहे किसान और मजदूरों का साझा संघर्ष रंग लाया है। उन्होंने कहा कि इस जीत का श्रेय आंदोलन के दौरान प्राण त्यागने वाले 700 किसानों को जाता है। उन्होंने देश के अन्नदाता की जीत के लिए अपने प्राण तक न्योछावर कर दिए।
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मान ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा की अगुवाई में चल रहे किसान आंदोलन ने एक नया इतिहास रचा है जिसे वर्षों याद रखा जाएगा। उन्होंने क हा कि एमएसपी की गारंटी और और बिजली संशोधन विधेयक वापस लेने पर संयुक्त किसान मोर्चा जो भी आदेश देगा उसका पालन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि संसद के शीतकालीन सत्र में सरकार को किसानों की सभी मांगे पूरी करनी चाहिए। उन्होंने आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों के परिवारों को आर्थिक सहायता के साथ रोजगार देने और आंदोलन के दौरान असंख्य किसान-मजदूरों पर बने मुकदमे वापस लेने की मांग भी उठाई। तीन कृषि कानून वापस लेने की घोषणा की जानकारी मिलते ही टोल प्लाजा पर मौजूद किसानों ने एक दूसरे को गले लगकर बधाई दी। इस दौरान कई किसान भावुक भी हो गए।
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संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर चल रहे किसानों के अनिश्चितकालीन धरने के 328वें दिन की अध्यक्षता सूबेदार सत्यवीर सिंह, पूर्व सरपंच बलबीर सिंह, जागेराम डीपीई, परमजीत फतेहगढ़, श्यामलाल, उमेद सिंह, कप्तान रामफल डोहकी, सुरेश सांगवान, बीरभान, बलजीत मानकावास, हरबीर नंबरदार, निहाल सिंह, महिपाल आर्य, सूरजभान पैंतावास, जोगेंद्र ठेकेदार, चेतराम, ईश्वर, राजपाल फौगाट, सुरेंद्र डोहकी व रायसिंह ने संयुक्त रूप से की।
हांसी महापंचायत के लिए रवाना हुआ जत्था
कितलाना टोल से किसानों का एक जत्था शुक्रवार हांसी में होने वाली किसान महापंचायत के लिए रवाना हुआ। जिसमें दादरी से निर्दलीय विधायक और सांगवान खाप के प्रधान सोमबीर सांगवान, सांगवान खाप के सचिव नरसिंह सांगवान डीपीई, किसान नेता गंगाराम श्योराण, श्योराण खाप के प्रधान बिजेंद्र बेरला, किसान सभा के कामरेड ओमप्रकाश, बलबीर बजाड़, मास्टर ताराचंद चरखी, सूरजभान सांगवान, सुरेंद्र कुब्जानगर, दिलबाग ढुल, रामफल देसवाल, नरेंद्र धनाना, सरोज श्योराण, सुशीला घणघस मुख्य रूप से शामिल रहे।

गांव काकड़ोली हुक्मी में खुशी प्रकट करते किसान। संवाद- फोटो : CharkhiDadri

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