चरखी दादरी। लंबे इंतजार के बाद जिला अस्पताल में फिजिशियन की तैनाती हो गई है। फिजिशियन डॉ. राहुल राठी ने बतौर एसएमओ सिविल अस्पताल में नियुक्ति ली है। कोरोना संक्रमण बढ़ने के दौरान जिले के लोगों के लिए यह राहत भरी खबर है। फिजिशियन की तैनाती से कोरोना संक्रमितों को तबियत बिगड़ने पर वेंटिलेटर सुविधा का लाभ मिल सकेगा। हालांकि अभी भी जिला अस्पताल में पीडिट्रिशियन (बाल रोग विशेषज्ञ) की कमी है, जो कोरोना काल में बच्चों के संक्रमित होने पर परेशानी का सबब बन सकती है।
जिला स्वास्थ्य विभाग के पास कोरोना संक्रमण की शुरुआत के बाद से अब तक 31 वेंटिलेटर आ चुके हैं। हालांकि कोविड काल से पहले विभाग के पास एक भी वेंटिलेटर नहीं था। सरकार ने विभाग को वेंटिलेटर तो प्रदान किए लेकिन जिले में स्थायी फिजिशियन की नियुक्ति नहीं की। ऐसे में कोरोना की दोनों लहरों में विभाग ने कभी निजी फिजिशियन की मदद ली तो कभी दूसरे जिलों से डेपुटेशन पर फिजिशयन बुलाए। हालांकि अब विभाग को स्थायी रूप से फिजिशियन मिल गया है। हालांकि अभी भी फिजिशियन का एक पद खाली पड़ा है।
- विशेषज्ञों की कमी के बावजूद जिला झेल चुका दो लहर
विशेषज्ञों की कमी के बीच जिला कोरोना की दो लहर झेल चुका है। इसके बावजूद यहां संक्रमण दर प्रदेश के अन्य जिलों के मुकाबले काफी कम रही। जिले में संक्रमितों की मौत की दर भी बहुत कम रही। हालांकि कोरोना की दूसरी लहर के पीक पर आने पर स्वास्थ्य विभाग ने रोहतक से दो फिजिशियन 14 दिन के लिए डेपुटेशन पर दादरी बुलाए थे।
तीसरी लहर में अब तक 12 बच्चे बन चुके शिकार
कोरोना की तीसरी लहर में युवा और बच्चे अधिक संक्रमित हुए। 28 दिसंबर से 14 जनवरी तक 12 बच्चों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। जिले में सबसे कम उम्र का संक्रमित एक साल का बालक मिला है। इसके अलावा जिले में चार, छह, आठ, 10, 11, 15, 16 साल के किशोर भी संक्रमित मिले हैं। ऐसे में सरकार व विभाग को जिले में बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती भी जल्द करनी चाहिए।
जिले को एक फिजिशियन मिल गया है। हमने अन्य विशेषज्ञों की मांग भी मुख्यालय को भेजी है। हमारे लिए इस समय बाल रोग विशेषज्ञ की कमी चिंता का विषय है। सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि दादरी के किसी भी निजी अस्पताल में भी बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है।
डॉ. सुदर्शन पंवार, सीएमओ, चरखी दादरी