चरखी दादरी। इस सीजन में गेहूं की आवक पिछले साल के मुकाबले बहुत कम रही। आलम यह है कि मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर गेहूं के लिए पंजीकरण करवाने वाले किसानों में से महज चार प्रतिशत ही खरीद केंद्रों तक पहुंचे हैं। इस साल गेहूं के लिए 17130 किसानों ने पंजीकरण करवाया था, जबकि जिले में अब तक 680 किसानों ने ही करीब 53 हजार क्विंटल गेहूं सरकारी एजेंसी को बेचा है। इस साल जिले में 57 हजार एकड़ भूमि पर गेहूं की बिजाई की गई थी।
जिले में इस साल आठ केंद्रों में से महज तीन पर ही गेहूं की खरीद हुई है। खास बात यह है कि इस बार किसानों ने एक ही सरकारी एजेंसी को गेहूं बेचने में दिलचस्पी दिखाई है। अब तक जिले में गेहूं की सारी सरकारी खरीद हैफेड ने की है, जबकि वेयर हाउस किसानों से एक दाना भी नहीं खरीद पाए हैं। खरीद केंद्रों की अगर स्थिति देखें तो दादरी मंडी के अलावा बौंदकलां व छपार केंद्र पर ही किसान पहुंचे हैं। इसके अलावा बाढड़ा, बधवाना, कादमा, बेरला और झोझूकलां खरीद केंद्र पर अब तक एक भी किसान अपनी उपज लेकर नहीं पहुंचा।
बौंदकलां केंद्र पर करीब 425 किसानों ने 36 हजार क्विंटल गेहूं बेचा है। इसके अलावा दादरी मंडी में करीब 160 किसानों ने 10 हजार क्विंटल गेहूं सरकारी एजेंसी को बेचा है। छपार केंद्र पर करीब सौ किसान पहुंचे और उन्होंने करीब छह हजार क्विंटल गेहूं हैफेड को बेचा है। इस सीजन में सर्वाधिक खरीद गत 19 अप्रैल को हुई है और उस दिन 52 किसानों से 4100 क्विंटल गेहूं खरीदा गया। वहीं, मंगलवार को जिले में लगातार चौथे दिन भी गेहूं की खरीद नहीं हुई और खरीद एजेंसी अधिकारी इसका कारण आवक न होना बता रहे हैं।
- सरकारी एजेंसी की बजाय प्राइवेट तौर पर बेची सरसों -
सरसों के लिए मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर इस साल 34 हजार किसानों ने पंजीकरण करवाया था। उम्मीद के मुताबिक सरसों मंडी में तो पहुंची, लेकिन किसानों ने सरकारी एजेंसी की बजाय निजी तौर पर ही अपनी उपज बेची है। इस बार सरसों का सरकारी भाव 5050 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि प्राइवेट तौर पर किसानों ने 6300 से लेकर 7 हजार रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से सरसों बेची है।
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वर्जन ::
इस बार गेहूं की आवक काफी कम हुई है, जिससे आढ़तियों के साथ श्रमिक भी परेशान हैं। पिछले चार दिनों से तो गेहूं की आवक न के बराबर है।
- रामकुमार रिटोलिया, प्रधान, नई अनाज मंडी।
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