चरखी दादरी। भूजल संरक्षण एवं सदुपयोग के लिए केंद्र सरकार ने जलदूत नाम से एप तैयार किया है। इसके तहत कुओं के पानी के लेवल की जांच की जाएगी। इसके लिए ग्राम सहायकों की तैनाती कर मदद ली जाएगी। सभी कुओं का डाटा तैयार कर भूजल वैज्ञानिक अगला प्लान तैयार करेंगे।
अब सरकार का ध्यान कुओं की ओर गया है। एक समय था जब ग्रामीण कुएं का पानी पीते थे, लेकिन धीरे-धीरे लोगों ने कुओं से निकासी बंद कर दी तो इनका पानी खराब हो गया। लोगों ने पेयजल सप्लाई का पानी इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। अब अधिकतर घरों में आरओ मशीन में फिल्टर कर लोग इस पानी का सेवन करते हैं। ऐसे में कुओं का अस्तित्व खत्म हो गया। ग्रामीण क्षेत्रों में 90 प्रतिशत कुएं तालाबों के किनारों पर ही बने हैं। जो अब जीर्ण-शीर्ण हालत में पहुंच गए हैं।
सरकार ने अब जलदूत नाम से एप लांच किया है। इसके तहत सभी कुओं के पानी के लेवल की जांच की जाएगी। इस काम के लिए ग्राम सहायकों की तैनाती की जाएगी। जो कुओं के लेवल की जांच करेंगे वो इसकी रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेजेंगे। उसके बाद भूजल वैज्ञानिक इस पर अध्ययन एवं अनुसंधान कर अगला प्लान तैयार करेंगे।
राज्य में खासकर दक्षिण हरियाणा में गिरता भूजल चिंता का विषय है। सरकार की ओर से जलशक्ति अभियान के तहत विभिन्न योजनाओं पर काम भी चल रहा है लेकिन धरातल पर कोई खास सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आ रहा है। गांवों में सोखता गड्ढे बनाए जाने का कार्य भी हुआ है, लेकिन यह प्लान धरातल पर सफल नहीं हो रही है। सोखता गड्ढे बनाने के बाद अब इनका नियमित रूप से रख-रखाव करना भी जरूरी है। बारिश में मिट्टी कटाव आदि से इनमें रुकावट आ जाती है। इसी प्रकार सरकारी विभाग, स्कूल भवनों की छत्तों के पानी को संग्रह करने की प्लानिंग पर भी काम हो रहा है। एक हजार वर्ग गज से ज्यादा आवासीय मकान व अन्य निर्मित भवनों में जल संग्रह के लिए योजना है लेकिन धरातल पर परिणाम सामने नहीं आ रहा है।
बाढड़ा में 500 फुट तक नीचे भूमिगत पानी
मानसून सीजन में इस बार सात जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। इन जिलों में विशेषकर दक्षिण हरियाणा प्रमुख रूप से शामिल है। इन जिलों में ही भूजल ज्यादा गिरता जा रहा है। चरखी दादरी का बाढड़ा उपमंडल डार्क जोन में है। इस क्षेत्र में भूजल 300 से 500 फुट नीचे तक है जो बेहद चिंता का विषय है। आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन बेहद कठिन साबित होगा। सिंचाई के लिए संकट पैदा होना स्वाभाविक है। चरखी दादरी जिले में मौजूदा मानसून सीजन में 347 एमएम बारिश हुई जो सामान्य से 150 एमएम कम है।
जैसे ही सरकार के निर्देश आते हैं इस प्लान पर तत्परता से काम शुरू कर दिया जाएगा। सरकार की यह अच्छी योजना है। कुओं का पानी पीने लायक होता था लेकिन निकासी बंद होने पर खराब हो गया।
डीएस राणा, हेडोलॉजिस्ट, भूजल विभाग