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कोरोना संक्रमण का खतरा पर... अब स्कूल खोलना जरूरी

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चरखी दादरी। कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा भले ही सिर पर मंडरा रहा है मगर बच्चों के भविष्य को देखते हुए अब स्कूल खोलने भी बहुत जरूरी है। पिछले करीब दो साल से बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह बाधित हुई है और बच्चे पढ़ाई से दूर हो गए हैं। अब परीक्षाएं सिर पर है। ऐसे में अब स्कूलों से बच्चों का जुड़ाव बहुत जरूरी है। यह तभी संभव है जब स्कूल पूरी तरह खुले। यह कहना है बच्चों के अभिभावकों व शिक्षकों का।
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जिला के अभिभावकों, छात्रों व शिक्षकों का मानना है कि सरकार व स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन के अनुरूप पहली से नौंवी कक्षा के स्कूल भी खोले जा सकते हैं। इनका मानना है कि बाजार, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन व सार्वजनिक स्थलों पर लोगों का आवागमन खुला है तो स्कूल भी खोले जा सकते हैं। प्रतिदिन तीन से चार घंटे पढ़ाई करवाई जा सकती है, क्योंकि दो साल से छात्रों की पढ़ाई ही नहीं, अपितु व्यक्तित्व विकास भी रुका हुआ है। छात्रों में संस्कार पैदा करने में विद्यालय की विशेष भूमिका होती है। मोबाइल पर ऑनलाइन पढ़ाई करने से छात्रों की मानसिक स्थिति पर भी नकारात्मक असर पड़ने लगा है। नेत्र दृष्टि पर भी बुरा असर पड़ा है। जब तक कक्षा में शिक्षक के सामने छात्र नहीं होगा तब तक शिक्षण का सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आएगा। अभिभावकों का कहना है कि वार्षिक परीक्षाओं का समय भी नजदीक आ गया है। मार्च माह में परीक्षाएं प्रस्तावित हैं।
कोट्स....
शिक्षक -
प्राइमरी व मिडिल स्तर की कक्षाएं लगाने में अब कोई समस्या नहीं है। कोरोना का पीक समय बीत चुका है। दो साल से छात्रों की पढ़ाई बाधित हो रही है। सरकार व स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन के अनुरूप प्राइमरी व मिडल स्कूलों में कक्षाएं लगाने में कोई दिक्कत नहीं है। प्रतिदिन तीन से चार घंटे पढ़ाई हो सकती है।
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- प्राचार्य सुखबीर सिंह डागर, केएन सीनियर सेकेंडरी स्कूल।
- कोरोना महामारी में प्राइमरी के छात्रों की पढ़ाई पर सबसे ज्यादा प्रतिकूल असर पड़ा है। खासकर पहली से चौथी कक्षा के छात्रों की पढ़ाई चौपट हो गई। अब कोरोना महामारी का प्रकोप खत्म होने को है। आम जन-जीवन पटरी पर है तो स्कूलों में भी कक्षाएं लगाने में कोई दिक्कत नहीं है। सरकार व विभाग की गाइडलाइन के अनुरूप स्कूल खोले जा सकते हैं।
- प्राचार्य सुनील कुमार, एचडी पब्लिक स्कूल बिरोहड़
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अभिभावक -
- मार्च माह में परीक्षाएं होनी हैं। पाठ्यक्रम पूरा करवाना जरूरी है। छात्रों पर वैसे ही दबाव बना हुआ है। अगर इस समय स्कूल खुल जाते हैं तो प्राइमरी व मिडिल कक्षाओं के छात्र भी सिलेबस को आसानी से कवर कर सकेंगे। सरकार नौवीं से नीचे स्कूल खोलने की तैयारी कर रही है। यह निर्णय स्वागत योग्य है।
- अभिभावक ओमबीर सिंह।
- छात्रों को दो साल से केवल कागज की डिग्री एवं प्रमाण पत्र ही मिल रहा है। उनका आंतरिक ज्ञान जागृत होने के बजाय शिथिल एवं स्थिर बना हुआ है। शिक्षक के बिना व्यक्तित्व विकास भी रुका हुआ है। सरकार व विभाग की गाइडलाइन के अनुसार नीचे स्तर की कक्षाएं भी लगाई जा सकती हैं। टीकाकरण का काम भी तकरीबन पूरा होने को है। मार्च से तो 15 साल से कम आयु के बच्चों को भी टीके लगने शुरू हो जाएंगे।
- अभिभावक रामकुमार, मानकावास।
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विद्यार्थी -
- मेरी पढ़ाई बाधित हो रही है। मुझे अब मार्च में होने वाली परीक्षाओं की चिंता सताने लगी है। ऑनलाइन पढ़ाई में पूरा सिलेबस ठीक प्रकार से कवर नहीं हो पाता है। प्रायोगिक विषय अधूरे रह जाते हैं। स्कूल खोल दिया जाए तो कक्षा में शिक्षक से हर टॉपिक को क्लीयर किया जा सकता है।
- छात्रा खुशी कक्षा आठवीं।
- घर में स्कूल जैसी पढ़ाई नहीं हो पाती। समय सारिणी भी गड़बड़ा जाती है। प्रैक्टिकल वर्क पूरा नहीं हो पाता। अब तो स्कूल खोलने का उचित समय है। परीक्षाएं भी नजदीक हैं। स्कूल खोले देने चाहिएं, चाहे थोड़े समय के लिए पढ़ाई करवा दी जाए। मोबाइल से पढ़ाई पर शिक्षण कार्य पूरी तरह से संभव नहीं है।
- छात्र साहिल, कक्षा आठवीं।
वर्जन::::
कक्षा नौंवी से नीचे की कक्षाएं लगाने पर विचार करने का सरकार का निर्णय स्वागत योग्य है। परीक्षाएं नजदीक हैं। स्कूल खोलने बेहद जरूरी हैं। छात्रों का भविष्य बर्बादी के कगार पर है। स्कूली सिलेबस ही नहीं, छात्र पाठशाला बिना संस्कार विहिन होने लगे हैं। शिक्षक ही छात्र के ज्ञान के कपाट खोलता है। सरकार व विभाग के निर्देशानुसार सभी कक्षाएं लगाई जा सकती हैं।
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- शिक्षक सुरेश कुमार, अध्यक्ष, प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन चरखी दादरी।
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