10 करोड़ के विकास कार्यों से चमकेंगे ‘म्हारे गाम’
सरपंचों का कार्यकाल पूरा होने और बीडीपीओ के प्रशासक नियुक्त होने पर गांवों में पहली इतनी बड़ी राशि होगी खर्च, 168 ग्राम पंचायतों से जुड़े 4.50 लाख ग्रामीणों को मिलेगा फायदा
फरवरी 2020 के बाद से गांवों में नहीं घूम पा रहा विकास का पहिया
चरखी दादरी। ग्राम पंचायतों का कार्यकाल पूरा होने के बाद से गांवों में विकास कार्य ठप है। सरपंचों से पावर वापस लेने के बाद बीडीपीओ ही गांवों की कमान संभाल रहे हैं। पिछले दो साल से समस्याओं से निजात मिलने की उम्मीद में बैठे ग्रामीणों को पंचायत विभाग अब दस करोड़ के विकास कार्यों की सौगात देने जा रहा है। इन कार्यों के प्रस्ताव ग्रामीणों के सुझाव के बाद ही तैयार हुए हैं। जल्द ही विभाग इन विभिन्न योजनाओं को अमलीजामा पहनाने की कवायद धरातल पर शुरू कर देगा। जिले के गांवों में दस करोड़ के विकास कार्य होने से करीब साढ़े चार लाख की आबादी को राहत मिलेगी।
गांवों में विकास कार्य फरवरी 2020 से ठप हैं। काफी समय पहले सरपंचों का कार्यकाल समाप्त होने व बीडीपीओ को प्रशासक नियुक्त किए जाने के बाद पहली बार विभाग जिला के विभिन्न गांवों में 10 करोड़ के बजट से विकास कार्य करवाएगा। ग्रामीणों से जरूरी कार्यों के सुझाव लेने और बाद में मौके से सर्वे रिपोर्ट जुटाने के बाद पंचायत विभाग ने प्रोजेक्ट तैयार किए हैं ताकि लोगों को मूलभूत सुविधाओं को लेकर परेशानी नहीं झेलनी पड़े। फिलहाल पंचायत चुनाव को लेकर अभी अनिश्चितता बनी है। पंचायत विभाग का बीडीपीओ पांच लाख से ज्यादा बजट राशि के विकास कार्य नहीं करवा सकता है। पांच लाख से ज्यादा बजट होने पर टेंडर प्रक्रिया से विकास कार्य करवाने होते हैं।
फरवरी माह में पंचायतों का कार्यकाल पूरा होने के बाद गांवों का कामकाज पंचायत विभाग के बीडीपीओ संभाल रहे हैं। गांवों में इस समय विभिन्न प्रकार के विकास कार्यों की जरूरत है लेकिन काम नहीं हो पा रहे हैं। जिससे ग्रामीणों को काफी परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। खासकर बड़े गांवों में नाला, गली निर्माण ,पेयजल लाइन बिछाने आदि कामकाज नहीं होने से ज्यादा दिक्कत बन रही है। जिला में 168 ग्राम पंचायतें हैं। पंचायतों के पास केंद्र व राज्य सरकार की ओर से जनसंख्या के आधार पर पीआरआई ग्रांट भी समय-समय पर आती हैं लेकिन अब सारा कामकाज बंद होने से दिक्कत बन रही है।
- विकास कार्यों के लिए बीडीपीओ को लेनी होती है एसडीएम से मंजूरी
सरकार ने बीडीपीओ को पांच लाख रुपये तक का बजट ही विकास कार्यों पर खर्च करने की अनुमति दे रखी है। इस राशि से ज्यादा बजट के विकास कार्य टेंडर के जरिये करवाए जाने के निर्देश हैं। बीडीपीओ को भी यह राशि खर्च करने के लिए एसडीएम की अनुमति लेनी होती है। वैसे भी पंचायत विभाग के अधिकारी इस समय गांवों में विकास कार्यों में कम ही रुचि दिखाते रहे हैं।
- इन समस्याओं से मिलेगी ग्रामीणों को राहत
कई गांवों में दूषित पानी की निकासी का प्रबंध नहीं होने से दिक्कत बन रही है। वहीं, कई गांवों में नालों के निर्माण की जरूरत है। गलियों के निर्माण और मरम्मत की भी दरकार है। पेयजल लाइनें बिछाना तो कई गांवों में बेहद जरूरी है। कुछ गांवों में तालाबों के जीर्णोद्धार का काम भी रुका हुआ है। अब इस 10 करोड़ के बजट से विभिन्न गांवों में अलग-अलग विकास कार्य करवाए जाएंगे। इसके लिए टेंडर जारी कर दिए हैं।
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जिस भी गांव से विकास कार्यों की डिमांड आती है। उस पर तत्परता से काम किया जाता है। मौके पर जाकर स्थिति का आकलन किया जाता है। ग्रामीणों के सहयोग से विकास कार्य करवाने के लिए पंचायत अधिकारी कृतसंकल्प हैं।
सुरेंद्र सिंह, ग्राम सचिव, पंचायत विभाग