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12 बैंकों की 71 शाखाओं पर लटके रहे ताले, तीन हजार से ज्यादा उपभोक्ता मायूस लौटे, 20 करोड़ का लेन-देन रहा प्रभावित

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12 बैंकों की 71 शाखाओं पर लटके ताले, तीन हजार से ज्यादा उपभोक्ता मायूस लौटे, 20 करोड़ का लेन-देन रहा प्रभावित
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सरकारी बैंक कर्मचारियों की दो दिवसीय हड़ताल के पहले ही दिन बैंक उपभोक्ताओं को झेलनी पड़ी परेशानी, निजीकरण के विरोध में कड़कड़ाती ठंड में सड़क किनारे कर्मचारियों ने दिया धरना
शहर में 13 बैंक शाखाएं रहीं बंद
चरखी दादरी। निजीकरण के विरोध में वीरवार को जिले के 12 सरकारी बैंकों की 71 शाखाओं पर ताले लटके रहे। इसके चलते करीब 20 करोड़ का लेन-देन प्रभावित रहा। हड़ताल के कारण तीन हजार से अधिक उपभोक्ताओं को मायूस होकर लौटना पड़ा। दो दिवसीय हड़ताल के पहले ही दिन दादरी शहर में इन बारह बैंकों की 13 शाखाएं बंद रही। वहीं, बैंक कर्मचारियों ने जिला मुख्यालय पर पीएनबी के बाहर सड़क किनारे बैठकर धरना दिया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रोष जताया। कर्मचारियों ने सरकार को चेताते हुए कहा कि अगर सरकारी बैंकों का निजीकरण बंद नहीं किया गया तो अनिश्चितकालीन हड़ताल करने से भी गुरेज नहीं करेंगे।
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पहले से प्रस्तावित हड़ताल में वीरवार को सभी सरकारी बैंकों के कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। ऑल इंडिया बैंक एसोसिएशन के धरने तले कर्मचारियों ने लोहारू रोड पीएनबी के बाहर सड़क किनारे बैठकर धरना दिया। इससे पहले कर्मचारियों ने बैैंक खुलते ही गेट बंद करवा दिए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए धरने पर बैठ गए। कर्मचारियों ने सरकार पर सरकारी बैंकों का निजीकरण कर कर्मचारियों को प्रताड़ित करने और उपभोक्ताओं के हितों से खिलवाड़ा करने का आरोप लगाया। दादरी जिले में 500 से अधिक कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए। ऑल इंडिया बैंक एसोसिएशन प्रदेश कार्यकारिणी के सह सचिव महेंद्र सिंह ने इसकी पुष्टि की।
उन्होंने कहा कि सरकार सरकारी बैंकों का निजीकरण कर बैंक कर्मचारियों के भविष्य से तो खिलवाड़ कर रही है, साथ में निजी हाथों में इनकी बागड़ोर सौंपकर पूंजीपतिवाद को बढ़ावा दे रही है। कर्मचारी एकजुटता के साथ सरकार के इस फैसले के विरोध में हड़ताल पर बैठे हैं। अगर सरकार ने अब भी सबक नहीं लिया तो कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल का भी बिगुल बजाने से पीछे नहीं हटेंगे। बैंक कर्मचारियों ने शाम धरना दिया।
इन बैंकों में लटके रहे ताले
दो दिवसीय हड़ताल के चलते वीरवार को पंजाब नेशनल बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, ग्रामीण क्षेत्रीय बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, कैनरा बैंक, इंडिया और यूको बैंक की शाखाओं ताले लटके रहे और कामकाज प्रभावित रहा।
- सड़कों पर उतर किया प्रदर्शन
धरना देने के साथ वीरवार को बैंक कर्मी सड़कों पर भी उतरे। कर्मचारियों ने धरना शुरू करने के करीब डेढ़ घंटे बाद शहर में प्रदर्शन भी किया। कर्मचारी पीएनबी से लेकर लघु सचिवालय तक नारेबाजी करते हुए पहुंचे। इस दौरान कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी के साथ बैंकों का निजीकरण कर अर्थ व्यवस्था से खिलवाड़ करने तक के आरोप लगाए।
- कर्मचारी बोले : किसी भी लिहाज से सही नहीं निजीकरण
हड़ताल में शामिल कर्मचारी आजाद, अनिल, सुरेंद्र, लख्मीचंद, सोमबीर, विजय, श्रवण, मंजीत, राहुल, सुनील, नवीन, जीत सिंह, प्रीत, सतेंद्र, राजेश, प्रियंका, राजवंती, राम, प्रवेश, संदीप, राजकुमार आदि ने कहा कि सरकारी बैंकों के निजीकरण का फैसला किसी भी लिहाज से सही नहीं है। बैंक कर्मचारी लगातार इसका विरोध कर रहे हैं लेकिन सरकार हठधर्मिता पर उतारू है।
- कोई जमा तो कोई निकलवा नहीं पाया कैश
पीएनबी पहुंची 58 वर्षीय नीलीमा देवी ने बताया कि उसके खाते में दो माह की पेंशन के रुपये हैं। वीरवार को वो पेंशन निकलवाने बैंक पहुंची थी, लेकिन यहां ताला लटका मिला और अब वो हड़ताल खत्म होने के बाद ही रुपये निकलवा पाएगी। इसी प्रकार बीओई शाखा पहुंचे वार्ड- 7 निवासी दिनेश ने बताया कि उसका बेटा चंडीगढ़ में पढ़ता है। उसके बैंक खाते में रुपये डलवाने वो आया था, लेकिन बैंक शाखा बंद मिली। खाते में रुपये डलवाना जरूरी है।
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वर्जन::
निजीकरण के विरोध में आज सरकारी बैंकों की शाखाएं बंद रही। पहले दिन राष्ट्रव्यापी हड़ताल सफल रही। अगर जरूरत पड़ी तो कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल से भी पीछे नहीं हटेंगे।
महेंद्र सिंह, सह सचिव, एआईबी प्रदेश कार्यकारिणी
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संवाद
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