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यूक्रेन के उजरोड से घर पहुंची किरण, बिगोवा निवासी निधि से परिजनों का हुआ संपर्क

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बंकर में ठहरे युवा। - फोटो : CharkhiDadri
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संवाद न्यूज एजेंसी
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चरखी दादरी। यूक्रेन में हालात सुधर नहीं रहे हैं और जिले के कई युवा अभी भी वहीं फंसे हैं। राहत की बात यह है कि जिला के डुडीवाला किशनपुरा निवासी किरण रविवार शाम अपने घर पहुंच गई। दिल्ली एयरपोर्ट से उसके पिता बिजेंद्र उसे सीधा अंबाला ले गए। वहीं, एक और राहत की खबर यह है कि बिगोवा निवासी निधि का भी परिजनों से संपर्क हो गया है और वो हंगरी बॉर्डर के जरिये स्वदेश लौटने का प्रयास कर रही है। दूतावास द्वारा मुहैया करवाई गई जगह से निकलने के बाद उसका परिजनों से संपर्क टूट गया था।
यूक्रेन में फंसे जिले के युवाओं में से कुछ के अभिभावकों की चिंता वापस लौटने पर खत्म हुई है, जबकि ज्यादातर अभी भी वहीं फंसे हुए हैं। इनके परिजन बेहद चिंतित हैं और उनकी वापसी के लिए अपने स्तर पर हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि अभी तक जिले के सभी युवा वहां सकुशल हैं। कुछ बंकर्स में ठहरे हैं, तो कुछ जान बचाने के लिए अभी फ्लैट में छिपे हैं। ये युवा वहां घटित हो रहीं गतिविधियों की जानकारी फोन या मेसेज के जरिये अपने परिजनों को दे रहे हैं।
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वहीं, इनके परिजन सरकार और भारतीय दूतावास से उनके बेटा-बेटी को सकुशल स्वदेश लाने की गुहार लगा रहे हैं। बच्चों के खतरे के बीच होने से परिजनों की दिनचर्या प्रभावित है। यहां तक कि घर के बुजुर्गों का भी चिंता से बुरा हाल है। वहां कदम-कदम पर बने खतरे के बारे में सोचकर परिजनों की आंखों से आंसू तक नहीं रुक रहे हैं और वहां फंसे बच्चों के परिजन एक-दूसरे से बातचीत कर दिलासा दे रहे हैं।
- तीन माह पहले ही पढ़ने उजरोड गई थी किरण -
किरण के पिता बिजेंद्र ने बताया कि रविवार शाम उनकी बेटी यूक्रेन से लौट आई है और वो उनके साथ अंबाला में है। वहां वो ट्रांसपोर्टर का काम करते हैं, जबकि उनका मूल गांव बाढड़ा का डुडीवाला किशनपुरा है। उन्होंने बताया कि किरण एमबीबीएस प्रथम वर्ष की छात्रा है और तीन माह पहले ही उसने यूक्रेन के उजरोड स्थित यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस में दाखिला लिया था। उन्होंने कहा कि बेटी के लौटने पर चिंताएं दूर हो गई हैं।
- हंगरी बॉर्डर तक पहुंचने के लिए निधि ने पकड़ी है बस
यूक्रेन में फंसी बिगोवा निवासी निधि की मां ने संवाददाता से बातचीत में बताया कि उनकी बेटी से बात हो गई है। हंगरी बॉर्डर के जरिये वो स्वदेश वापसी के प्रयास में है। उसके साथ करीब 50 युवा हैं और इसके लिए उन्होंने हंगरी बॉर्डर की बस सोमवार दोपहर एक बजे पकड़ी है। वहां तक पहुंचने में उन्हें छह से सात घंटे का समय लगेगा। उन्होंने कहा कि बेटी से बात होने के बाद उनकी चिंता थोड़ी कम हुई है।
- फ्लैट में छिपे हुए हैं हम, खिड़की के पास जाने में भी लगता है डर
वार्ड-20 निवासी आदित्य की सोमवार दोपहर बड़ी बहन अनुष्का से बात हुई। आदित्य ने उसे बताया कि फिलहाल वो आठ विद्यार्थी एक फ्लैट में छिपे हैं। कर्फ्यू अभी लगा हुआ है, जिसके चलते वाहन नहीं चल रहे। आलम यह है कि खिड़की के पास खड़े होने में भी डर लगता है और वो फ्लैट के सबसे पीछे वाले कमरे में बैठे रहते हैं।
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- खारकीव में फंसा है बाढड़ा निवासी महेश -
बाढड़ा निवासी महेश खारकीव स्थित केएनएम यूनिवर्सिटी में फोर्थ ईयर का छात्र है। उसके पिता मनोज ने बताया कि महेश की 28 फरवरी की टिकट थी, लेकिन उससे पहले ही हवाई सेवा बंद हो गईं। उनका बेटा वहां बंकर में रुका हुआ है और उसने बंकर के अंदर के हालातों की वीडियो भी उनके पास भेजी है। वहीं, मां सुलीन का कहना है कि उन्हें विश्वास है कि बेटा जल्द सकुशल घर लौट आएगा।

निधि ।- फोटो : CharkhiDadri

उजरोड से लौटी किरण को लेने एयरपोर्ट पहुंचे परिजन।- फोटो : CharkhiDadri

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