चरखी दादरी। गर्मी की छुट्टियों में कक्षा चौथी से आठवीं के विद्यार्थियों को राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं अध्यापक प्रशिक्षण परिषद की ओर से तैयार की गई उड़ान नामक वर्क बुक से होम वर्क मिलेगा। शिक्षकों के लिए भी एक मॉड्यूल पुस्तिका तैयार की गई है। शिक्षक इन कक्षाओं के छात्रों का उपचारात्मक शिक्षण करवाएंगे। इसके लिए शिक्षकों को सक्षम सहयोगी के तौर पर प्रशिक्षण दिया जा चुका है। डीईईओ, डीपीसी व डाइट प्रिंसिपल स्वयं इसकी मॉनिटरिंग करेंगे। इस कार्य योजना का प्रतिदिन मूल्यांकन भी होगा।
इन कक्षाओं के विद्यार्थियों की शिक्षण कमजोरियों को दूर करने के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं अध्यापक प्रशिक्षण परिषद(एसईआरटी) की ओर विशेष शिक्षण योजना तैयार की गई है। इसका नाम रेमिडियल टीचिंग यानी उपचारात्मक शिक्षण दिया गया है। इसके तहत इन कक्षाओं के विद्यार्थियों के शिक्षण स्तर में सुधारने की दिशा में काम किया जाना है। जिन छात्रों में कक्षा पाठ्यक्रम को कवर करने में कठिनाई रही है और उनके टॉपिक क्लीयर नहीं हो पाए, उनको दूर करने का प्रयास किया जाएगा ताकि वे अपनी आयुवर्ग में अपनी कक्षा में पिछड़ने न पाएं।
कक्षाओं में प्रतिदिन दो घंटे शिक्षण होने के बाद उसी दिन मूल्यांकन होगा। शिक्षक को प्रत्येक विद्यार्थी का मूल्यांकन करना होगा ताकि पता चल सके कि विद्यार्थियों ने कितना ज्ञान ग्रहण किया है। मूल्यांकन के बाद शिक्षण में रही कमियों को दूर करने के बाद विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए अधिगम की कमजोरियों को दूर करने की कोशिश की जाएगी। इस उपचारात्मक शिक्षण को सही ढंग से क्रियान्वित करने के लिए डीईईओ, जिला शिक्षा परियोजना अधिकारी व डाइट प्रिंसिपल मॉनिटरिंग करेंगे। शिक्षा अधिकारी शिक्षकों व विद्यार्थियों का फीडबैक भी लेंगे। फीडबैक से इसकी सफलता का आकलन होगा। विभाग इसके लिए स्कूल हैड व दो-दो सक्षम सहयोग शिक्षकों को प्रशिक्षण पहले ही दे चुका है। इसके लिए ब्लॉक व जिला स्तर पर शिक्षण योजना तैयार की जा चुकी है।
- प्रतिदिन दो घंटा होगा उपचारात्मक प्रशिक्षण
शिक्षक कक्षाओं में प्रतिदिन दो घंटे उपचारात्मक शिक्षण करवाएंगे। यह शिक्षण प्रत्येक विषय में करवाया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक शिक्षक को एसईआरटी की ओर से जारी सिलेबस का मॉड्यूल दिया जाएगा। इसी प्रकार विद्यार्थियों को वर्क बुक दी जाएगी। वर्क बुक में सिलेबस के आवश्यक बिंदुओं को शामिल किया गया है। इन शिक्षण बिंदुओं को शिक्षक समझाएगा और विद्यार्थी सीखकर इनका अभ्यास करेंगे, ताकि पीछे की कमजोरी दूर हो सके।
उपचारात्मक शिक्षण की पूरी योजना तैयार कर ली गई है। गर्मी की छुट्टियों में उड़ान नामक वर्क बुक से होमवर्क दिय जाएगा। इसके लिए शिक्षकों को आवश्यक हिदायतें व प्रशिक्षण दिया जा चुका है। विद्यार्थियों में शिक्षण कमजोरियों को दूर करने के लिए यह योजना तैयार की गई है जो बेहद कारगर साबित होगी।
- डॉ. महेंद्र सिंह, बीआरपी, शिक्षा विभाग।