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कॅरियर में सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है हिंदी

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आदर्श स्कूल में आयोजित गोष्ठी में विचार रखती छात्रा। - फोटो : CharkhiDadri
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चरखी दादरी। बौंदकलां स्थित आदर्श स्कूल में सोमवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से हिंदी हैं हम विषय पर विचार गोष्ठी करवाई गई। गोष्ठी में आठवीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों ने भाग लिया। विद्यार्थियों ने कहा कि हिंदी भी कॅरियर में सफलता प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करती है। हिंदी की अनिवार्यता पर सरकार और विभाग के साथ आमजन को भी बल देना चाहिए। हिंदी भाषा बोलते समय हमें गर्व महसूस करना चाहिए।
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इससे पहले दीप प्रज्वलन के साथ आयोजन की शुरुआत हुई। विचार गोष्ठी की अध्यक्षता प्रधानाचार्य कृष्णदत्त यादव ने की, जबकि स्कूल निदेशक प्रताप सिंह यादव भी मौजूद रहे। स्कूल प्रधानाचार्य ने विद्यार्थियों को हिंदी हैं हम मुहिम के बारे में जानकारी दी और इससे जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इस मुहिम के निकट भविष्य में सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। कार्यक्रम का समापन सराहनीय अभिव्यक्ति देने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित करके किया गया।
हिंदी के प्रति विद्यार्थियों को प्रेरित करें शिक्षक
हिंदी को सभी प्रकार की प्रतियोगी परीक्षाओं में विशेष स्थान मिलना चाहिए। आईएएस जैसी परीक्षाओं में भी हिंदी पर आधारित प्रश्न पूछने चाहिए, तभी इस भाषा का तेज गति से प्रचार संभव है। स्कूली स्तर पर शुरू से ही हिंदी के प्रचार पर बल देना चाहिए। प्रत्येक देशवासी अपना योगदान देकर हिंदी को शिखर तक ले जा सकता है।
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अंजू, छात्रा
संस्कृत की तर्ज पर हिंदी के स्पेशल स्कूल एवं कॉलेज भी खोले जा सकते हैं ताकि इसको और ज्यादा बढ़ावा मिल सके। हिंदी की जरूरत आज विदेशों में भी महसूस होने लगी है। कई देशों में हिंदी विश्वविद्यालय खुलने लगे हैं। शिक्षकों को चाहिए कि वे शुरू से ही हिंदी के प्रति विद्यार्थियों को प्रेरित करें।
अंशु, छात्रा
जब तक हिंदी भाषा पर पकड़ नहीं होगी तब तक व्यक्ति किसी दूसरी भाषा को आसानी से नहीं समझ सकता। हिंदी भाषा के शब्दों के उच्चारण से अन्य भाषाओं को पढ़ने में भी मदद मिलती है। हिंदी की वर्णमाला पूरी तरह से प्रमाणिक है। हिंदी पर हमें गर्व करना चाहिए। विशेषकर छात्रों को हिंदी को बढ़ावा देने के लिए आगे आना चाहिए।
आशीष, छात्र
हिंदी भारत की शान है। हिंदी पखवारा की बजाय इसके प्रचार के लिए वर्ष भर कार्यक्रम आयोजित होने चाहिए। हिंदी पर विद्यार्थी व शिक्षकों को सबसे ज्यादा गर्व प्रकट करना चाहिए। हिंदी समाज के लिए दर्पण का भी काम करती है। हिंदी की अपनी शैली है, जो बेहद सरल है। अन्य भाषाएं सीखने के साथ हमें मातृभाषा को बढ़ावा देना चाहिए।
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दक्ष, छात्र
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