फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हिंदी है हिंदुस्तान का मान, हमें भी मिली पहचान

विज्ञापन
विज्ञापन
चरखी दादरी। हिंदी ने आज पूरी दुनिया में पहचान बनाई है। हिंदी के बल पर ही देश प्रगति कर रहा है। वाचन एवं लेखन शक्ति का विकास शुरू हिंदी से ही होता है। हिंदी देश के माथे की बिंदी और हिंदुस्तान का मान है। इससे से हमें पहचान मिली है। यह बात जिले के लेखकों व साहित्यकारों ने अमर उजाला के ‘हिंदी है हम’ अभियान पर प्रतिक्रिया देते हुए कही।
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि एक अच्छा पाठक ही हिंदी का बढ़िया लेखक बन सकता है। ऐसे में हिंदी में खासकर साहित्य अध्ययन की भूमिका को किसी भी कीमत पर नकारा नहीं जा सकता है। मोबाइल के इस्तेमाल से वाचन, लेखन शक्ति जरूर खत्म होने लगी है। हिंदी के प्रत्येक शब्द में शक्ति होती है। युवाओं को हिंदी अध्ययन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि हिंदी भाषा भी पहचान बनाने का जरिया है।
हिंदी का साहित्य ही समाज का दर्पण
शिक्षक जितेंद्र गोयल का कहना है कि आज रचनाएं कम होती जा रही हैं। हिंदी को जिंदा रखने की जरूरत है। हिंदी के बिना जीवन में व्यक्तित्व विकास संभव नहीं है। हिंदी का साहित्य ही समाज का दर्पण है। स्थानीय वैश्य स्कूल में कार्यरत हिंदी शिक्षक एवं रचनाकार जितेंद्र गोयल की लघु कथा, तेरा-मेरा सबका सच, हरियाणा साहित्य अकादमी की ओर से प्रकाशित हो चुकी है। इस समय जितेंद्र गोयल अपराध बोध नामक रचना कर रहे हैं।
विज्ञापन

साहित्य को जिंदा रखना बेहद जरूरी
साहित्यकार व हिंदी प्राध्यापक नव रत्न पांडे का कहना है कि हिंदी विषय में खासकर साहित्य को जिंदा रखना बेहद जरूरी है। हिंदी में उपन्यास, नाटक, निबंध व कहानियों पर आधारित पुस्तकें व्यक्ति की सच्ची मित्र होती हैं। जो मानवीय मूल्यों का विकास करती हैं। साहित्यकार नवरत्न पांडे द्वारा रचित साइबर छोरा और नाटक संकलन हरियाणा साहित्य अकादमी की ओर से पांच माह पहले ही प्रकाशित हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें