चरखी दादरी। मरीजों को जिला मुख्यालय पर ही डायलिसिस, सिटी स्कैन और एमआरआई जैसी मूलभूत सुविधा मुहैया करवाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जगह चिह्नित कर ली है। मातृ-शिशु अस्पताल में करीब पांच हजार वर्ग गज जगह का प्रपोजल जिला अधिकारियों ने मुख्यालय भेज दिया है। सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए भवन और अन्य व्यवस्थाएं टेंडर के जरिये उच्चाधिकारियों की ओर से की जानी है। दादरी में ही इन तीनों सुविधाओं का लाभ मिलने से प्रतिवर्ष करीब ढाई हजार मरीजों की भिवानी और रोहतक पीजीआई की भागदौड़ बचेगी।
दादरी सिविल अस्पताल में डायलिसिस, एमआरआई और सिटी स्कैन जैसी मूलभूत स्वास्थ्य सेवाएं मरीजों को नहीं मिल पा रही हैं। वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर मरीजों को भिवानी भेजा जा रहा है। सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर छह कैटेगरी को इन सुविधाओं का लाभ निशुल्क मिलता है, जबकि अन्य लोगों के लिए रेट निर्धारित हैं। ये रेट प्राइवेट केंद्रों के रेट के मुकाबले आधे ही हैं। ऐसे में सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर आधे रेट में एमआरआई और सिटी स्कैन करवाने के लिए जिले के मरीजों को भिवानी आने-जाने में 60 किलोमीटर की भागदौड़ करनी पड़ रही है। फिलहाल प्रतिमाह 200 मरीज रेफर किए जा रहे हैं।
सिविल अस्पताल की दैनिक ओपीडी 600 से पार है। यहां से एमआरआई और सिटी स्कैन के लिए मरीज पर्ची देकर भिवानी रेफर किए जा रहे हैं। इसके चलते मरीजों को दूसरे जिलों की भागदौड़ करनी पड़ रही है। सिविल अस्पताल में की इन सेवाओं के लिए की गईं वैकल्पिक व्यवस्थाओं की संवाददाता ने पड़ताल की तो सामने आया कि जनवरी 2018 से यह सिलसिला जारी है। शुरुआती दो साल तक मरीजों की संख्या प्रतिमाह 150 से नीचे रही, लेकिन अब यह संख्या 200 से ऊपर पहुंच चुकी है। वहां वो सरकार द्वारा तय रेट पर अपना सिटी स्कैन और एमआरआई करवा रहे हैं। अगले दिन उन्हें रिपोर्ट मिलती है। वहीं, कुछ मरीज तो भिवानी जाने के झंझट से बचने के लिए सरकारी के मुकाबले दोगुने रेट पर निजी केंद्रों पर जाकर ये दोनों टेस्ट करवा रहे हैं। अब तक करीब 4500 मरीज भिवानी रेफर किए जा चुके हैं।
जानिए....कैसे रेफर किए जा चुके हैं 4500 से अधिक मरीज
जनवरी 2018 में दादरी से मरीजों को भिवानी रेफर करने की शुरुआत की गई थी। इसके लिए अस्पताल के पुराने भवन में एक कक्ष बनाया गया है। शुरुआती साल में तो प्रतिमाह 50 ही मरीज रेफर किए गए, जबकि दूसरे साल इनकी संख्या 125 पहुंच गई। पिछले सवा साल से प्रतिमाह 200 से अधिक मरीज भिवानी रेफर किए जा रहे हैं। इस लिहाज से यह आंकड़ा 4500 बनता है।
इन कैटेगरी को एमआरआई और सिटी स्कैन की मिलती है निशुल्क सुविधा
सरकार की ओर से छह कैटेगरी के लिए एमआरआई और सिटी स्कैन की निशुल्क सुविधा का प्रावधान किया गया है जबकि बाकी कैटेगरी के रेट डीजी ऑफिस से तय किए गए हैं। प्राइवेट के मुकाबले ये रेट आधे ही हैं। सरकारी कर्मचारी, बीपीएल कार्डधारक, एससी वर्ग, दिव्यांग, इकोनॉमिकल विकर सेक्शन व हादसा ग्रस्त मामले में ये दोनों सेवाएं निशुल्क है।
सरकारी और निजी केंद्रों के रेट में अंतर
एमआरआई :
अंग सरकारी फीस निजी केंद्रों की फीस
कमर 2390 4500 से 6000
घुटने 2390 4600 से 5800
कंधे 2390 4600 से 6000
सिटी स्कैन
अंग सरकारी फीस निजी केंद्रों की फीस
पेट 2870 6000
सिटी हेड 910 1800 से 2500
पसली 1810 4400 से 5500
एमसीएच में ये तीनों सुविधाएं शुरू की जाएंगी और इसका प्रपोजल तैयार कर हम मुख्यालय भेज चुके हैं। अगली प्रक्रिया उच्चाधिकारियों की ओर से अमल में लाई जानी है और तब तक वैकल्पिक व्यवस्था के सहारे की इन सेवाओं का मरीजों को लाभ दिया जाएगा। - डॉ. संजय गुप्ता, डिप्टी सीएमओ