चरखी दादरी। दादरी-लोहारु रोड स्थित किसान मॉडल स्कूल भवन में शुरू किया गया राजकीय पीजी कॉलेज डेपुटेशन के स्टाफ के सहारे चल रहा है। यहां महज दो ही प्राध्यापक तैनात हैं जबकि विद्यार्थियों की संख्या 243 है। कॉलेज में मूलभूत सुविधाओं की भी कमी है जिसका खामियाजा विद्यार्थी भुगत रहे हैं।
जिले में सरकारी पीजी कॉलेज निर्माण की मांग करीब दो दशक पुरानी थी। गत वर्ष ही सरकार ने यह मांग परवान चढ़ाते हुए इसे खोलने की अनुमति दी थी। उस समय जिला प्रशासन को अस्थायी भवन की व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे। इन निर्देशों गत अगस्त माह में तत्कालीन उपायुक्त प्रदीप गोदारा ने किसान मॉडल भवन को राजकीय कॉलेज की अस्थायी जगह के लिए उपयुक्त माना था। इसके बाद विभाग की ओर से यहां कक्षाएं शुरू की गई थीं। अस्थायी भवन और पहले सत्र में विभिन्न संकायों के करीब 243 विद्यार्थियों ने यहां दाखिला लिया था।
वहीं, स्टाफ की तैनाती की अगर बात करें तो यहां महज दो ही प्राध्यापक तैनात हैं। ये दोनों प्राध्यापक भी डेपुटेशन पर भेजे गए हैं। इनका भी पता नहीं कब वापसी का बुलावा आ जाए। इनमें से एक प्राध्यापक इतिहास तो दूसरा गणित विषय का है। सूत्रों के अनुसार दोनों प्राध्यापकों का डेपुटेशन पीरियड जून में खत्म हो जाएगा। कॉलेज में अब तक किसी प्राध्यापक की स्थायी नियुक्ति नहीं की गई है। कॉलेज में बीकॉम व बीए की कक्षाएं ही शुरू की गई हैं। इनमें पढ़ने वाले विद्यार्थियों को हिंदी, अंग्रेजी, भूगोल, अर्थ शास्त्र, समाज शास्त्र, बिजनेस स्टडी आदि विषय पढ़ाने के लिए शिक्षक ही नहीं है। दूसरी ओर विभाग ने नए भवन और अन्य सुविधाओं के लिए 20 करोड़ रुपये के बजट की मांग गत दिनों सरकार से की थी।
- अब तक 16 शिक्षक डेपुटेशन पर दे चुके सेवाएं
गत अगस्त माह में राजकीय कॉलेज में कक्षाएं शुरू की गई थीं। इन नौ माह के अंदर यहां 16 शिक्षक डेपुटेशन पर भेजे जा चुके हैं। कोई भी शिक्षक यहां लंबे समय तक नहीं टिक पाया है। यही कारण है कि अब विद्यार्थियों को दोनों प्राध्यापकों का डेपुटेशन पीरियड होने की चिंता सता रही है। कॉलेज में विद्यार्थियों के लिए बैठकर पढ़ने के लिए लाइब्रेरी की जगह तो है लेकिन यहां पुस्तकें नहीं हैं।
- प्राध्यपकों की कमी से शो-पीस बनी लैब
कॉलेज के अंदर ज्योग्राफी व अन्य प्रकार की लैब तो हैं लेकिन विद्यार्थियों को सिखाने के लिए प्राध्यापक नहीं हैं। इसके चलते विद्यार्थी लैब सुविधा का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। ऐसे में ये लैब शो-पीस बनकर रह गई है।
-एक कर्मचारी देख रहा सारे काम
कॉलेज में अस्थायी तौर पर दो कर्मचारी नियुक्त है। उनमें से हरीश कौशिक सारे विभाग की डिलिंग कर रहा है। अपने स्तर पर खुद के खर्चे से बच्चों के लिए पीने का पानी की व्यवस्था वो कर रहे हैं। इसके अलावा अन्य कोई काम जो वो अपने स्तर पर कर सकते हैं, उसे पूरा करने में भी विद्यार्थियों की मदद करते हैं।
कॉलेज में शिक्षकों की पोस्ट सेंशन नहीं हो पाई है, इसलिए स्थायी तौर पर कोई भी शिक्षक यहां नहीं है। जो शिक्षक डेपुटेशन पर आए हैं वो दूर-दराज के चलते ट्रांसफर करवाकर गए हैं। उच्चतर शिक्षा विभाग को शिक्षकों की कमी के बारे में अवगत करवा चुके हैं।
-रचना गोयत, कार्यवाहक प्राचार्या, राजकीय कॉलेज, चरखी दादरी।
विद्याथी बोले: प्राध्यापकों की तैनाती के साथ मूलभूत सुविधाएं मिले
कॉलेज तो सरकार ने शुरू करवा दिया है, लेकिन यहां न तो प्राध्यापक हैं और न ही अन्य मूलभूत सुविधाएं। सभी विषयों के प्राध्यापक जल्द से जल्द कॉलेज में नियुक्त करने चाहिए।
-राहुल, छात्र, बीए प्रथम वर्ष
कॉलेज में सुविधाओं की कमी है जबकि विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं हैं। इसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। नौ माह बाद भी कॉलेज को स्थायी प्राध्यापक नहीं मिले हैं।
-नवदीप, छात्र, बीए प्रथम वर्ष
कई विषयों के शिक्षक ही नहीं है। अगर विद्यार्थी अपने स्तर पर किसी विषय की तैयारी करना चाहे तो इसके लिए लाइब्रेरी में पुस्तकों की कमी है। कॉलेज शुरू होने के नौ माह बाद भी लाइब्रेरी सुविधा नहीं मिली है।
-उत्तम शर्मा, छात्र, बीए प्रथम वर्ष
न तो कोई खेलने के लिए स्पोर्ट्स ग्राउंड है और न ही यहां पर पढ़ाने के लिए शिक्षक हैं। इसके चलते यहां विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। सरकार को जल्द से जल्द दादरी राजकीय कॉलेज में सुविधाएं मुहैया करवानी चाहिए।
-मंजीत शर्मा, छात्र, बीए प्रथम वर्ष
प्राध्यापक के बिना सूनी पड़ी ज्योग्रफी लैब।- फोटो : CharkhiDadri
किसान मॉडल संस्कृति स्कूल के परिसर के अंदर स्थित राजकीय कॉलेज का भवन।- फोटो : CharkhiDadri