चरखी दादरी। रामादल सेवा समिति का साझा चूल्हा पिछले 56 साल से लगातार जल रहा है। साढ़े पांच दशक से अधिक की समयावधि बीतने पर भी यह चूल्हा एक दिन भी बंद नहीं हुआ है। संस्था रेलवे स्टेशन क्षेत्र में खाने के पैकेट का निशुल्क वितरण करती है और यह मुहिम शहर के सतीश चंद्र नामक व्यापारी ने 1974 में शुरू की थी, जो अभी भी जारी है। मुहिम को पिछले 25 सालों से जारी रखने सतीशचंद्र के भतीजे विनोद उर्फ पप्पू गोयल का कहना है कि प्रतिदिन 300 लोगों को निशुल्क भोजन वितरण किया जा रहा है।
विनोद गोयल का कहना है कि 1974 में उनके ताऊ सतीश चंद्र ने यह मुहिम शुरू की थी। उस समय होटल वगैरा नहीं होते थे, जबकि दादरी रेलवे स्टेशन से सवारी ट्रेनें गुजरती थीं और सफर के दौरान यात्रियों कोई खाद्य सामग्री नहीं मिल पाती थी। इसके अलावा क्षेत्र में कई ऐसे लोग और परिवार थे, जो अपने लिए दो जून की रोटी का जुगाड़ करने में भी असमर्थ थे। ऐसे लोगों को खाली पेट न सोने देने के लिए रामादल सेवा समिति का गठन कर यह मुहिम शुरू की गई थी। वे बताते है कि रेलवे स्टेशन पर पिछले 47 सालों से निशुल्क खाना वितरित किया जा रहा है।
प्रतिदिन 300 लोगों को भोजन किया जाता है वितरित
रामादल सेवा समिति के प्रयासों की सराहना प्रशासनिक अधिकारियों समेत राजनेता भी कर चुके हैं। दादरी रेलवे स्टेशन निशुल्क भोजन वितरण होने के चलते अपनी पहचान भी बनाए हुए है। अब भी संस्था प्रतिदिन करीब 300 लोगों को भोजन मुहैया करवा रही है इसमें 150 ट्रेन यात्री और 150 गरीब तबके के लोग हैं। अब खाना पैकेट में वितरित किया जाता है। जिसमें रोटी के अलावा सब्जी और आचार भी होता है। संस्था पदाधिकारियों के अनुसार एक साल में एक लाख से अधिक खाने के पैकेट वितरित किए जाते हैं और पिछले 47 सालों में 50 लाख से अधिक लोगों को भोजन वितरित किया जा चुका है।
इनके जज्बे को सलाम.... सेवानिवृत्त के बाद जनसेवा को समर्पित किया जीवन, व्यापारी आर्थिक मदद के साथ दे रहे समय भी
मेरी उम्र 69 साल है और मैं करीब 11 साल पहले सेवा दल से जुड़ा था। मैं बिजली विभाग से फोरमैन सेवानिवृत्त हूं और सेवानिवृत्ति के बाद से यह कार्य कर रहा हूं। इस कार्य से मन को शांति मिलती है और प्रयास रहेगा कि ये काम ताउम्र करता रहूं। - सीताराम, संगठन सदस्य
मैं पिछले करीब 25 साल से इस मुहिम से लगातार जुड़ा हूं। मेरे ताऊ ने ये मुहिम शुरू की थी। मेरा प्रयास रहेगा की अंतिम सांस तक ये नेक कार्य जारी रहे। जरूरतमंदों की मदद करके काफी अच्छा लगता है। सहयोग के लिए शहर के व्यापारियों का मैं शुक्रगुजार हूं। - विनोद उर्फ पप्पू गोयल, संस्था प्रधान
मेरी उम्र 50 साल है और पिछले लंबे समय से मैं संगठन के साथ रेलवे यात्रियों और गरीब लोगों को भोजन वितरण का कार्य कर रहा हूं। मैं एक मिल में नौकरी करता हूं और मालिक की ओर से भी इस नेक कार्य के लिए मुझे सहयोग किया जाता है। - कटार सिंह, संगठन सदस्य
मेरी उम्र 60 साल है और मैं एक मिल में श्रमिक हूं। मैं पिछले लंबे सम से संस्था से जुड़ा हुआ हूं। व्यापारी इस नेक कार्य में खूब मदद करते हैं और हमारा प्रयास रहेगा कि भोजन वितरण का यह कार्य लगातार जारी रहे। - विजय, संगठन सदस्य