चरखी दादरी। इस बार मानसून में पर्याप्त बारिश नहीं हुई है। इसके चलते जिले की 1.21 लाख हेक्टेयर में से 70 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में किसानों काे सिंचाई करके सरसों की बिजाई करनी पड़ेगी। इससे हजारों लीटर डीजल की खपत होगी और उन पर 4.25 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पडे़गा। इससे सीधे तौर पर प्रति एकड़ लागत खर्च भी बढ़ जाएगा।
इस बार बारिश कम होने से बरानी एरिया में बिजाई का रकबा भी घटने के आसार बन गए हैं। इस बार जिले में 352 एमएम बारिश हुई जबकि सामान्य तौर पर 455 एमएम तक बारिश होनी चाहिए। मानसून सीजन में अगस्त व सितंबर माह सूखा रहने पर रबी सीजन की नकदी माने जाने वाली सरसों की बिजाई के लिए किसानों को मोटा खर्च झेलना पड़ेगा। किसानों को सिंचाई करके गेहूं, जौ व सरसों की बिजाई करनी पड़ेगी। इस बार जिले का बिजाई कर रकबा भी घटने के आसार बन गए हैं। सरसों की बिजाई का आंकड़ा इस बार 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र रहने का अनुमान है।
जिले में रबी की फसलों के रूप में अधिकतर किसान गेहूूं, सरसों, जौ की ज्यादा मात्रा में बिजाई करते हैं। मानसून की औसत बारिश होने पर अक्तूबर माह के अंत तक खेतों में नमी यानी आल बनी रहती थी लेकिन इस बार बारिश नहीं होने से जमीन में नमी नहीं है। इस वजह से किसानों के पास सिंचाई करके ही बिजाई करने का विकल्प बचा है अन्यथा काफी एरिया बिना बिजाई के भी रहने के आसार बने हुए हैं।
- बाढड़ा क्षेत्र है रेतीला, ट्यूबवेल से होती है सिंचाई
जिले का बाढड़ा एरिया रेतीला है। इस एरिया में तो बिजली या सोलर चालित ट्यूबवेल से सिंचाई की जाती है। चरखी दादरी ब्लॉक के एरिया में नहरें भी गुजरती हैं लेकिन नहरों पर सरकारी मोगों की संख्या कम होने की वजह से सिंचाई की व्यवस्था नहीं बन पाती इस वजह से किसान नहरी पानी की चोरी करने को विवश हो जाते हैं।
- प्रति एकड़ 12 लीटर डीजल की होगी खपत
किसान अगर नहरों पर इंजन व ट्रैक्टर मशीन आदि लगाकर पानी का उठान करते हैं तो भी प्रति एकड़ कम से कम 12 लीटर डीजल की खपत होती है। इससे प्रति एकड़ लागत खर्च बढ़ेगा। बाढड़ा एरिया में तो जमीनी पानी 400 फीट नीचे तक चला गया है। - अक्तूबर अंत तक शुरू होगी बिजाई
श्राद्ध के बाद आमतौर पर किसान सरसों की बिजाई शुरू कर देते हैं लेकिन तापमान अधिक बने रहने की वजह से किसान सरसों की बिजाई आजकल देरी से करने लगे हैं। गेहूं की बिजाई का समय नवंबर प्रथम सप्ताह में शुरू हो जाता है जिसकी 25 नवंबर तक अगेती बिजाई की जा सकती है। जिन किसानों ने धान की रोपाई कर रखी है वो फसल लेकर गेहूं की पछेती बिजाई कर सकते हैं।
- किसान बोले : बिजाई से पहले करनी होगी सिंचाई
किसान मनोज कुमार, भीम सिंह, कृष्ण कुमार व कपिल का कहना है कि इस बार तो रबी की फसलों की बिजाई करने से पहले सिंचाई करनी पड़ेगी, तब जाकर सरसोंं, जौ व गेहूं आदि की बिजाई हो सकेगी। किसानों का कहना है कि सिंचाई के लिए प्रति एकड़ 12 लीटर डीजल की खपत हो जाती है।
वर्जन:
इस बार मानसून बारिश कम होने की वजह से बिजाई का रकबा घटने के आसार है। अब रबी की फसलों की बिजाई करने में किसान को कठोर मेहनत के साथ आर्थिक बोझ भी झेलना पड़ेगा।
-डॉ. चंद्रभान, कृषि विशेषज्ञ